Maha Shivratri 2021: 3 कारणों से मनाते हैं महा​शिवरात्रि, जानें पौराणिक कथा

पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तीन कारणों से महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, जिसमें शिव-पार्वती का विवाह सबसे ज्यादा प्रचलित है। इस कारण से महाशिवरात्रि को कई स्थानों पर रात्रि में शिव बारात भी निकाली जाती है। महाशिवरात्रि इन तीन वजहों से मनाई जाती है:

 
Maha Shivratri 2021: 3 कारणों से मनाते हैं महा​शिवरात्रि, जानें पौराणिक कथा
New Delhi: हिन्दू धर्म में महा​शिवरात्रि (Maha Shivratri 2021) के पर्व का विशेष महत्व है। इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व 11 मार्च 2021 दिन गुरुवार को है। इस बार महा​शिवरात्रि के दिन सर्वार्थसिद्धि योग बनने से इसकी महत्ता और बढ़ गई है।

हिन्दू कैलेंडर के 12 मास में 12 शिवरात्रि होती हैं, लेकिन महाशिवरात्रि (Maha Shivratri 2021) और शिवरात्रि में बड़ा अंतर है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है? आइए इन प्रश्नों के उत्तर जानते हैं।

​महाशिवरात्रि क्यों मनाते हैं?

पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तीन कारणों से महाशिवरात्रि (Maha Shivratri 2021) का पर्व मनाया जाता है, जिसमें शिव-पार्वती का विवाह सबसे ज्यादा प्रचलित है। इस कारण से महाशिवरात्रि को कई स्थानों पर रात्रि में शिव बारात भी निकाली जाती है। महाशिवरात्रि इन तीन वजहों से मनाई जाती है:

1. शिव-पार्वती विवाह

माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हुई थी। इस तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती के महामिलन के उत्सव के रूप में मनाते हैं। महाशिवरात्रि के दिन शिव-पार्वती का विवाह होने से इसका महत्व ज्यादा है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से वे जल्द प्रसन्न होते हैं। एक मान्यता यह भी है कि महाशिवरात्रि का व्रत रखने से विवाह में आ रही अड़चनें दूर होती हैं, विवाह जल्द होता है।

2. महादेव का शिवलिंग स्वरूप

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन ही महोदव अपने शिवलिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे। तब सबसे पहले ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु ने उनकी विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की थी। इस वजह से महाशिवरात्रि के दिन विशेष तौर पर शिवलिंग की पूजा करने का विधान है।

3. विषपान कर संसार को संकट से उबारा

कहा जाता है कि समुद्र मंथन से निकले विष का पान करके भगवान शिव ने इस सृष्टि को संकट से बचाया था, इस वजह से ही महाशिवरात्रि मनाई जाती है। सागर मंथन से निकले विष का पान करने से भगवान शिव का गला नीला पड़ गया था, जिस कारण उनको नीलकंठ भी कहा जाता है।

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