विधु विनोद चोपड़ा ने ‘शिकारा’ के आलोचकों को बताया गधा, कहा ‘पता था कि कितनी चलेगी फिल्म’

Shikara Controversy
New Delhi: बॉलिवुड के गिने-चुने पॉप्युलर निर्देशकों में से एक विधु विनोद चोपड़ा इन दिनों अपनी लेटेस्ट फिल्म शिकारा (Shikara Controversy) को लेकर विवादों में चल रहे हैं।

दरअसल, उनपर अपनी इस फिल्म (Shikara Controversy) के जरिए कश्मीरी पंडितों के मुद्दे का व्यवसायीकरण करने का आरोप लग रहा है, जिसके बाद उनपर निशाना साधने वाले लोगों गधा बताया है। उनका कहना है कि जो लोग उनकी इस फिल्म को लेकर ऐसी बातें सोच रहे हैं वे गधे हैं।

आरोप लगाने वालों को चोपड़ा ने कहा- गधा

बता दें कि फिल्म (Shikara Controversy) रिलीज़ के बाद से ही विवादों में है और सोशल प्लैटफॉर्म पर इस फिल्म को बॉयकॉट करने के लिए #BoycottShikara भी खूब चला। हालांकि, इससे पहले भी विधु विनोद चोपड़ा अपनी इस फिल्म पर लोगों की नाराजगी को लेकर अपनी राय दे चुके हैं।

अब एएनआई ने विधु विनोद चोपड़ा के उस बयान का जिक्र करते हुए ट्वीट किया है, जिसमें निर्देशक ने फिल्म का व्यवसायीकरण करने का आरोप लगाने वालों को गधा बताया है।

उनका कहना है कि जिस फिल्म को बनाने के पीछे 11 साल की मेहनत लगी है, आज रिजल्ट फनी है। उनका कहना है कि मैंने एक फिल्म बनाई जिसने पहले दिन 30 करोड़ कमाई और यह फिल्म जो मैंने अपनी मां की याद में बनाई है, उसने 30 लाख कमाई और लोग कहते हैं कि मैंने कश्मीरी पंडितों के दर्द को भुनाया है।

‘3 इडियट्स’ ने 33 करोड़ कमाई और ‘शिकारा’ ने 30 लाख

इस ट्वीट में लिखा गया है, ‘3 इडियट्स ने पहले दिन 33 करोड़ रुपए की कमाई की और हमें पता था कि शिकारा अपने पहले दिन 30 लाख की कमाई करेगी। मैंने यह फिल्म अपनी मां की याद में बनाई है, जिसने पहले दिन 30 लाख की कमाई की है और कुछ लोगों का कहना है कि मैंने कश्मीरी पंडितों के दर्द का व्यवसायीकरण किया है। ये लोग गधे हैं।’

IMDB पर घट चुकी है रेटिंग

उन्होंने मीडिया से हई बातचीत में बताया कि सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर नाराजगी के अलावा जिस चीज ने उन्हें सबसे ज्यादा हैरान कर दिया है वह IMDB पर उनकी इस फिल्म को मिली रेटिंग, जो 8 या 9 से घटकर 1 पर पहुंच गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विधु का कहना है कि पहले उनकी इस फिल्म को अच्छी प्रतिक्रिया मिली और अच्छे रिव्यू मिले और फिर सोशल मीडिया पर अचानक इसे लेकर नफरत भरी आवाजें बुलंद होती दिखीं। उनका कहना है कि लोग सोशल मीडिया पर विडियो शेयर कर कहने लगे कि किस तरह से उनकी फिल्म को एक स्टार की रेटिंग दी जा सकती है।

‘पहले फिल्म देखिए, फिर अपनी राय दीजिए’

हाल ही में विधु फिल्म के लीड कलाकारों आदिल और सादिया के साथ फिल्म का प्रमोशन करने मुंबई के केसी कॉलेज पहुंचे थे, जहां उन्होंने कहा कि पहले फिल्म देखिए, फिर अपनी राय दीजिए। बता दें कि ‘शिकारा’ 90 के दशक की उस वक्त की कहानी है, जब तकरीबन 4 लाख कश्मीरी पंडितों को अपने घरों से निकाल कर विस्थापित कर दिया गया था। इस फिल्म के संवेदनशील विषय के कारण इसकी रिलीज पर रोक लगाने की मांग पहले ही की गई थी, मगर फाइनली फिल्म को रिलीज की मंजूरी मिल गई।

विधु ने कहा, मूर्खतापूर्ण हैं ये बातें

बता दें कि रिलीज़ होने के बाद से ही इस फिल्म को लेकर बहस जारी है। दर्शकों का आरोप है कि फिल्म में कश्मीरी पंडितों के दर्द का दिखाकर इसका व्यवसायीकरण किया गया है। हाल ही में चोपड़ा ने यह भी कहा था कि उन्हें इन आरोपों से काफी दुख पहुंचा है और एक ओपन लेटर के जरिए इन बातों को मूर्खतापूर्ण बताया था।

जब कश्मीरी महिला फूट-फूट कर रो पड़ीं

पिछले दिनों इस फिल्म को लेकर मामले ने तब तूल पकड़ी, जब इसे देखने के बाद एक कश्मीरी महिला फूट-फूट कर रो पड़ीं। महिला और आरोप लगाया कि चोपड़ा ने समुदाय की ‘तकलीफों का व्यवसायीकरण’ कर दिया है। कश्मीरी पंडितों को 1990 के दशक में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के सिर उठाने के बाद अपना घर-बार छोड़ना पड़ा था।

ओपन लेटर के जरिए विधु ने रखी थी अपनी बात

इसके बाद विधु ने ओपन लेटर के जरिए इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए काफी कुछ कहा था। विधु विनोद चोपड़ा ने खुद को ‘प्रभावित कश्मीरी हिन्दू’ बताते हुए याद किया कि कैसे कश्मीर में उनके मकान में लूटपाट हुई थी और उनके परिवार पर हमला हुआ था।

उन्होंने अपने प्रॉडक्शन हाउस के बैनर के सोशल मीडिया अकाउंट पर यह ओपन लेटर शेयर किया था। उसमें लिखा है, ‘मेरी मां परिंदा फिल्म के प्रीमियर के लिए एक छोटा सा सूटकेस लेकर मुंबई आई थीं और वह घर वापस नहीं जा सकीं… वह निर्वासन में मुंबई में ही मरीं… अब मुझ पर आरोप लगाया जा रहा है कि मैं अपनी आत्मा बेच रहा हूं, कश्मीरी पंडितों के मुद्दे का व्यवसायीकरण कर रहा हूं।’

‘शिकारा’ उनकी मां का सच है

विधु विनोद चोपड़ा ने कहा है कि उन्होंने ‘शिकारा’ इसलिए बनाई है क्योंकि उन्होंने खुद देखा है कि सिर से छत छिन जाना क्या होता है। उन्होंने अपनी बातें रखते हुए कहा, ‘आपका तो जन्म भी नहीं हुआ था जब 1990 में हमें हमारे घर से भगा दिया गया था और अगर आपको इतिहास नहीं पता है तो आप उसे दोहराने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा है कि शिकारा उनकी सच्चाई है। यह उनकी मां की सच्चाई है। यह उनके को-राइटर राहुल पंडित की सच्चाई है।