'गंगा में तैरती लाशें...ऑक्सिजन अरेंज नहीं पाए...' RJD MP मनोज झा ने जमकर की सरकार की धुलाई

 
'गंगा में तैरती लाशें...ऑक्सिजन अरेंज नहीं पाए...' RJD MP मनोज झा ने जमकर की सरकार की धुलाई

NewzBox Desk: राज्यसभा (Rajya Sabha) में कोरोना पर बहस के दौरान आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा (RJD MP Manoj Kumar Jha) ने अपनी बात रखी। 

उन्होंने कहा कि पूरे सदन को उनलोगों से माफी मांगनी चाहिए जिनकी लाशें गंगा में तैर रही थीं, मगर उन्हें कभी स्वीकार नहीं किया गया। ऑक्सिजन की कमी का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि सासंद होने के बावजूद वे लोगों की मदद नहीं कर पाए।

'तैरती लाशों के नाम साझा माफीनामा जारी हो'

आरजेडी सांसद मनोज झा (RJD MP Manoj Kumar Jha) ने राज्यसभा (Rajya Sabha) में कहा कि 'हमें उन सबके नाम एक साझा माफीनामा जारी करनी चाहिए, जिनकी लाशें गंगा में तैर रही थीं। जिनके बारे में हमें कभी कुछ पता नहीं चल पाएगा। क्या राजीव सातव की उम्र थी जाने की? ऑक्सिजन के लिए लोग तड़पते छटपटाते नजर आए। अस्पतालों में जगह नहीं थी। यह किसकी असफलता थी? रेमडेसिवर...और भी कई दवाएं हैं जिनका नाम कोई नहीं जानता था, वह नाम रट गए लेकिन समय पर दवाएं नहीं मिलीं।' राजीव सातव राज्यसभा में कांग्रेस के सदस्य थे, जिनका कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण 46 वर्ष की आयु में 16 मई को निधन हो गया।

जिंदगी से ज्यादा गरिमा मौत को चाहिए- मनोज झा

मनोज झा (RJD MP Manoj Kumar Jha) ने कहा 'यह हमें मानना चाहिए कि जिंदगी को जितनी गरिमा चाहिए, उससे अधिक गरिमा मौत को चाहिए। गंगा में तैरती लाशें...क्या इतिहास हमें माफ कर पाएगा? सचमुच यह बहुत अफसोस की बात है कि एक पूरा तंत्र नाकाम रहा। क्या हम तीसरी लहर से निपटने के लिए तैयार हैं, यह आत्ममंथन हमें करना होगा।' उन्होंने कहा कि 'सरकार को सभी के लिए चिकित्सा का अधिकार के मकसद से कानून बनाना चाहिए।'

'देश में कोई ऐसा नहीं, जिसने अपनों को न खोया हो'

मनोज झा (RJD MP Manoj Kumar Jha) ने कहा कि 'इस सदन में, सदन के बाहर या फिर देश में कोई भी ऐसा आदमी नहीं है, जिसने अपनों को न खोया हो।' इसके बाद मनोज झा भावुक हो गए। 

उन्होंने कहा कि 'लोग ऑक्सिजन के लिए फोन करते थे हम अरेंज नहीं कर पाते थे। लोग सोचते हैं कि सांसद तो ऑक्सिजन बिछा देगा। शाम को देखते थे सक्सेस रेट दो...सक्सेस रेट तीन।' मनोज झा ने कहा कि 'जो लोग गए वो जिंदा दस्तावेज छोड़कर गए हैं हमारी असफताओं का।'

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