Breaking! हैकर्स के निशाने पर थे राहुल, PK, रंजन गोगोई! पेगासस फोन हैकिंग मामले में बड़ा दावा

 
Breaking! हैकर्स के निशाने पर थे राहुल, PK, रंजन गोगोई! पेगासस फोन हैकिंग मामले में बड़ा दावा

NewBoxDesk: Pegasus Report: पेगासस फोन हैकिंग विवाद (Pegasus Phone Hacking Controversy) तूल पकड़ता जा रहा है। मामले में फिर एक बड़ा दावा हुआ है। इसमें कहा गया है कि फोन हैकर्स के निशाने पर राहुल गांधी (Rahul Gandhi), प्रशांत किशोर (Prashant Kishor), अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee), रंजन गोगई (Ranjan Gogoi), अशोक ल्वासा (Ashok Lawasa) के साथ केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnav) और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल (Prahlad Singh Patel) के नाम थे। 

द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक, लीक हुए डेटा (Pegasus Report) में 300 भारतीय मोबाइल नंबर शामिल हैं, जिनमें 40 मोबाइल नंबर भारतीय पत्रकारों के हैं। इनके अलावा तीन बड़े विपक्षी नेता, मोदी सरकार में दो केंद्रीय मंत्री, सुरक्षा एजेंसियों के मौजूदा- पूर्व प्रमुख और अधिकारी, बिजनेमैन शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि इन नंबरों को 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले 2018-2019 के बीच निशाना बनाया गया था।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को भी टारगेट बनाया गया है। इस लिस्ट में सबसे चौंकाने वाला नाम केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का है, जिन्हें पीएम मोदी ने हालही अपने कैबिनेट में शामिल किया है। उन्होंने आईटी मंत्री के रूप में रविशंकर प्रसाद की जगह ली। इनको जब 2018-19 में निशाना बनाया गया, तब ये सांसद थे।

प्रशांत किशोर ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी के प्रचार में बड़ी भूमिका निभाई थी, जिसके बाद भाजपा स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में आई थी। इसके बाद से भाजपा की कई विरोधी पार्टियों ने उनसे संपर्क किया। हालही में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और तमिलनाडु में एमके स्टालिन की जीत का भी श्रेय उन्हें दिया गया।

पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ शिकायतों पर चुनाव आयोग के फैसले पर असहमतिपूर्ण राय दर्ज करवाई थी। उन्होंने चुनाव आयोग की बैठकों में भाग लेना भी बंद कर दिया था, उनका कहना था कि उनकी बात नहीं सुनी जाती है। 

दुनियाभर के 17 मीडिया संस्‍थानों के कंसोर्टियम ने रविवार को एक रिपोर्ट छापी थी। इसके बाद हलचल मच गई थी। दावा किया गया है कि भारत समेत कई देशों की सरकारों ने 150 से ज्‍यादा पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अन्‍य ऐक्टिविस्‍ट्स की जासूसी कराई।

इसके लिए इजरायल के NSO ग्रुप के 'पेगासस' स्‍पाईवेयर का इस्‍तेमाल किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कम से कम 38 लोगों की निगरानी की गई। हालांकि, भारत सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

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