किसानों के समर्थन में आए नवजोत सिंह सिद्धू, पटियाला-अमृतसर में अपने घरों पर लगाए काले झंडे

पंजाब के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने किसान आंदोलन (Navjot Singh Sidhu support Kisan Andolan) के समर्थन में अपने घर पर काले झंडे लगाए है। सिद्धू के पटियाला और अमृतसर वाले आवास पर काले झंडे देखे जा सकते हैं।
 
किसानों के समर्थन में आए नवजोत सिंह सिद्धू, पटियाला-अमृतसर में अपने घरों पर लगाए काले झंडे

अमृतसर। पंजाब के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने किसान आंदोलन (Navjot Singh Sidhu support Kisan Andolan) के समर्थन में अपने घर पर काले झंडे लगाए है। सिद्धू के पटियाला और अमृतसर वाले आवास पर काले झंडे देखे जा सकते हैं। बता दें कि 26 मई को किसानों के आंदोलन के छह महीने पूरे हो रहे हैं। इस दिन को किसान काला दिवस के तौर मना रहे हैं। 

काला दिवस के लिए पंजाब के गांव-गांव में तैयारियां चल रही हैं, लोग काले झंडे और काले कपड़े सिलवा रहे हैं। इसी के तहत आज सिद्धू ने अपने घर पर काला झंडा लगाया है।


नवजोत सिंह सिद्धु (Navjot Singh Sidhu support Kisan Andolan) ने सोमवार को ट्वीट कर कहा था कि वह किसानों के समर्थन में अपने घर पर काला झंडा लहराएंगे और उन्होंने अन्य लोगों से भी ऐसा ही करने का आह्वान किया हैं। 

सिद्धू (Navjot Singh Sidhu support Kisan Andolan)ने ट्वीट किया, किसानों के प्रदर्शन के समर्थन में मैं अपने दोनों घरों (अमृतसर और पटियाला) पर कल सुबह साढ़े नौ बजे काला झंडा लहराऊंगा... सभी से अनुरोध है कि वे भी ऐसा तब तक करें जब तक कि इन काले कानूनों को वापस नहीं ले लिया जाता या राज्य सरकार के जरिये निश्चित एमएसपी और खरीद की वैकल्पिक प्रक्रिया मुहैया नहीं करा दी जाती।

पंजाब के किसानों ने दिल्ली की सीमा के लिए कूच किया

पंजाब के किसान बड़ी संख्या में दिल्ली की सीमा के लिए कूच कर रहे हैं। यह दावा भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की पंजाब इकाई के नेताओं ने किया। उन्होंने बताया कि केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन के छह महीने 26 मई को पूरे हो रहे हैं और इस दिन को काला दिवस के रूप में मनाने के लिए संगठन के आह्वान पर किसान कूच कर रहे हैं।

गौरतलब है कि तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर किसान दिल्ली की सिंघू, टिकरी और गाजीपुर सीमा पर नवंबर से ही प्रदर्शन कर रहे हैं जबकि केंद्र सरकार का दावा है कि ये कानून किसानों के हित में हैं। किसानों और केंद्र के बीच इस मुद्दे पर 22 जनवरी से कोई बातचीत नहीं हुई है।

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