अब बाजार में मिलेगी डीआरडीओ की कोरोना दवा 2DG, डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज ने किया ऐलान

देश में कोरोना वायरस संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका के बीच डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज (Dr Reddy's Laboratories) ने कोरोना रोधी दवा 2DG के कामर्शियल लॉन्च की घोषणा कर दी है।
 
अब बाजार में मिलेगी डीआरडीओ की कोरोना दवा 2DG, डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज ने किया ऐलान

नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका के बीच डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज (Dr Reddy's Laboratories) ने कोरोना रोधी दवा 2DG के कामर्शियल लॉन्च की घोषणा कर दी है। कंपनी ने सोमवार को इसका ऐलान करते हुए कहा कि अब यह दवा बाजार में भी मिलेगी। 

बता दें 2-डीजी (2 DG) दवा डीआरडीओ (DRDO) की प्रयोगशाला, नाभिकीय औषधि एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (INMAS) ने डॉ. रेड्डी लेबोरेटरीज (Dr Reddy's Laboratories) के साथ मिलकर विकसित की है। क्लिनिकल ट्रायल के नतीजों में देखा गया कि यह अणु अस्पताल में भर्ती मरीजों को तेजी से बीमारी से उबरने और ऑक्सीजन पर निर्भरता को कम करने में मदद करता है। 

माना जा रहा है कि ये कोरोना के मॉडरेट से लेकर गंभीर लक्षणों वाले मरीजों के लिए काफी कारगर होगा और सबसे बड़ी बात कि ऑक्सीजन पर निर्भरता को कम करेगा। ये काम की बात है क्योंकि कोविड की दूसरी घातक लहर के दौरान अप्रैल-मई के दौरान ऑक्सीजन संकट के कारण बहुत से कोरोना मरीजों की जान गई।

कैसे काम करती है दवा?

ये ग्लूकोज से बनने वाली दवा है, जो कैंसर के मरीजों पर भी सहायक दवा के तौर पर इस्तेमाल होती रही। ये मेटाबॉलिज्म पर असर करते हुए ग्लाइकोलाइसिस नाम के रास्ते में रुकावट डालती है। इससे कोशिकाओं में ग्लूकोज का बनना बाधित होता है। बता दें कि कोरोना वायरस कोशिकाओं के भीतर ग्लूकोज में भी तेजी से बढ़ता है। यानी अगर इस प्रक्रिया को ही कमजोर कर दिया जाए तो वायरस का पनपना भी कम हो सकेगा। स्टडी में देखा गया कि दवा उन्हीं कोशिकाओं को टारगेट करती है, जहां वायरस हों। ये वहां जाकर अतिरिक्त ग्लूकोज बनने को रोकता है और वायरस का मल्टीप्लाई होना कमजोर पड़ता जाता है।

क्या पहले इस्तेमाल हुआ है?

2-डीजी को अब तक किसी बीमारी में मुख्य इलाज के तौर पर नहीं लिया गया। वैसे कथित तौर पर कैंसर के 200 से ज्यादा क्लिनिकल ट्रायल में इसका उपयोग कहा जाता है। फिलहाल भी माना जा रहा है कि संक्रमित कोशिकाओं तक जाकर ग्लूकोज उत्पादन रोक दवा वायरस के पनपने पर लगाम लगा सकेगी। 

पिछले एक साल में दुनिया के अन्य हिस्सों से प्रकाशित कुछ शोध पत्रों में थेरेपी के रूप में 2-डीजी की संभावित भूमिका पर भी चर्चा हुई लेकिन अब तक ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं आई, जिसमें अस्पतालों में कोविड मरीजों पर इसके उपयोग की बात हो।

2 DG का प्री-क्लिनिकल ट्रायल अप्रैल 2020 में हुआ। इसमें दिखा कि कैसे दवा वायरस के खिलाफ काम करती है। इसके बाद मई से अक्टूबर 2020 के बीच 17 अस्पतालों के 110 कोरोना मरीजों पर क्लिनिकल ट्रायल हुआ। दिसंबर 2020 से लेकर मार्च 2021 के बीच 27 अस्पतालों के 220 मरीजों पर फेज-3 ट्रायल किया गया। इस दौरान DRDO और रेड्डीज लैब ने मिलकर काम किया।

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