कोरोना से मौतों के सरकारी आंकड़ों और श्मशानों-कब्रिस्तानों के आंकड़ों में फर्क क्यों: प्रियंका गांधी

कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi Campaign) ने मोदी सरकार के खिलाफ 'जिम्मेदार कौन' अभियान शुरू कर दिया है। इस अभियान के तहत प्रियंका गांधी हर रोज फेसबुक और ट्विटर के माध्यम से मोदी सरकार के सामने सवालों की झड़ी लगा रही है। 
 
कोरोना से मौतों के सरकारी आंकड़ों और श्मशानों-कब्रिस्तानों के आंकड़ों में फर्क क्यों: प्रियंका गांधी

लखनऊ। कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi Campaign) ने मोदी सरकार के खिलाफ 'जिम्मेदार कौन' अभियान शुरू कर दिया है। इस अभियान के तहत प्रियंका गांधी हर रोज फेसबुक और ट्विटर के माध्यम से मोदी सरकार के सामने सवालों की झड़ी लगा रही है। 

इसी कड़ी में मंगलवार को प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi Campaign) ने ट्वीट पर वीडियो शेयर करते हुए कहा, मोदी सरकार ने आंकड़ों को जागरूकता फैलाने और कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने का साधन बनाने के बजाय प्रोपागैंडा का साधन क्यों बना दिया?

मौतों के आंकड़ों में फर्क क्यों

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi Campaign) ने ट्विटर पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा, कोरोना से हुई मौतों के बारे में सरकार के आंकड़ों और श्मशानों-कब्रिस्तानों के आंकड़ों में इतना फर्क क्यों? मोदी सरकार ने आंकड़ों को जागरूकता फैलाने और कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने का साधन बनाने के बजाय प्रोपागैंडा का साधन क्यों बना दिया?


जिम्मेदार कौन है

प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi Campaign) ने कहा है कि पहली लहर के दौरान आंकड़ों को सार्वजनिक ना करना, दूसरी लहर में इतनी भयावह स्थिति पैदा होने का एक बड़ा कारण था। जागरूकता फैलाने की बजाय सरकार आंकड़ों में हेरफेर करती रही। जबकि विशेषज्ञ मानते हैं कि आंकड़ों की पारदर्शिता जरूरी है कि क्योंकि इससे ही पता लगता है- बीमारी का फैलाव क्या है, संक्रमण ज्यादा कहां है। इसके बाद ही सही रणनीति बनती है कि कैसे इससे निपटना है लेकिन ये सब नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार कोरोना डाटा में पारदर्शिता रखती तो स्थिति इतनी भयावह स्थिति नहीं होती।

यूपी के आंकड़ों पर भी उठाए सवाल

प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi Campaign) ने उत्तर प्रदेश में कोरोना के आकंड़ों के साथ हेरफेर की बात कही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के 27 जिलों में 1100 किमी की दूरी में गंगा किनारे 2000 शव मिले लेकिन इनको सरकारी आंकड़ों में कहीं शामिल नहीं किया। यहां तक कि प्रयागराज में गंगा के किनारे दफनाए गए शवों की बात मीडिया में आने पर सरकार नेकब्रों के निशान मिटाने की मशां से उन पर पड़ी चादरें तक उतरवा लीं।

गुजरात के चार शहरों के आंकड़े किए शेयर

गुजरात के अहमदाबाद, सूरत, राजकोट, बडोदा में जारी हुए मृत्यु प्रमाण पत्रों और सरकारी आंकड़ों में कोरोना से हुई मौतों की संख्या को शेयर करते हुए प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi Campaign) ने कहा कि डाटा में गड़बड़ की गई है। दूसरी लहर के दौरान गुजरात में 71 दिनों में 1,24,000 मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किए गए लेकिन गुजरात सरकार ने सिर्फ 4,218 कोरोना मौतें बताईं। अमहदाबाद में 13,593 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हुए, सरकारी आंकड़ों में सिर्फ 2,126 मौतें बताई गईं। सूरत में 8,851 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हुए और सरकारी आंकड़ें में 1,074 मौतें दर्ज हुईं। राजकोट में 10,887 डेथ सर्टिफिकेट जारी हुए लेकिन आंवड़ों में सिर्फ 208 मौतें हैं।

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