गृहमंत्री अनिल देशमुख इस्तीफा नहीं देंगे, शरद पवार भी 'महाराष्ट्र सरकार' हैं : संजय राउत

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के लेटर बम से गृहमंत्री अनिल देशमुख पर लगे वसूली वाले आरोप के बाद उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackrey) सरकार संकट में है। इस बीच संजय राउत (Sanjay Raut) ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और यह साफ किया कि पवार की भूमिका ही सरकार की भूमिका है।
 
गृहमंत्री अनिल देशमुख इस्तीफा नहीं देंगे, शरद पवार भी 'महाराष्ट्र सरकार' हैं : संजय राउत

नई दिल्ली। मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के लेटर बम से गृहमंत्री अनिल देशमुख पर लगे वसूली वाले आरोप के बाद उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackrey) सरकार संकट में है। विपक्ष लगातार गृहंमंत्री अनिल देशमुख के इस्तीफे की मांग कर रहा है। इस बीच संजय राउत (Sanjay Raut) ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और यह साफ किया कि पवार की भूमिका ही सरकार की भूमिका है।

संजय राउत (Sanjay Raut) से पत्रकारों ने जब यह सवाल किया कि कल एनसीपी की पीसी में शरद पवार ने जो कहा कि अनिल देशमुख के इस्तीफे की जरूरत नहीं, इस पर शिवसेना की क्या भूमिका है? इसका जवाब देते हुए संजय राउत ने साफ कहा कि पवार वरिष्ठ नेता हैं। एनसीपी और शिवसेना की भूमिका में कोई फर्क नहीं है। पवार की भूमिका ही सरकार की भूमिका है। यानी अनिल देशमुख का इस्तीफा नहीं लिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट में न्याय नहीं मिलता

संजय राउत (Sanjay Raut) ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश और वर्तमान में राज्य सभा सांसद रंजन गोगोई की कही बातों की मिसाल देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में न्याय नहीं मिलता। सीबीआई और ईडी की तरह सुप्रीम कोर्ट का भी इस्तेमाल किया जाता है। यह मैं नहीं कह रहा, यह पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा है। अगर परमबीर सिंह के सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर देने से भाजपा को लगता है कि सरकार दबाव में आ जाएगी, तो यह उनकी भूल होगी। भाजपा अपनी सुविधा के हिसाब से राजनीति ना करे, राजनीति हमें भी करनी आती है।

…जाओ पहले उनका इस्तीफा लेकर आओ

संजय राउत (Sanjay Raut) ने कहा कि पत्र कोई सबूत नहीं होता। किसी पुलिस अधिकारी के लिखे पत्र को मान कर इस्तीफा नहीं लिया जा सकता। पत्र की जांच होती है। अगर ऐसा है तो दो पूर्व आईपीएस और आईएएस संजीव भट्ट और मिस्टर शर्मा ने गुजरात सरकार पर परमबीर सिंह से भी ज्यादा गंभीर आरोप लगाए थे। क्या उस वक्त के गुजरात के मुख्यमंत्री से इस्तीफा लिया गया? अगर पत्र को ही सबूत मानना है तो पहले उस वक्त के गुजरात के मुख्यमंत्री पर कार्रवाई कीजिए। आज वे दोनों अधिकारी जेल में हैं। गुजरात के लिए कुछ और महाराष्ट्र के लिए कुछ और नीति नहीं चल सकती।

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