अब ग़म में नहीं रोना है!

sad poetry cry

अश्कों के मोतियों को
खुशियों से पिरोना है
ग़म में नहीं रोना है
अब ग़म में नहीं रोना है!

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हाथों की लकीरों को
अच्छे से संझोना है,
बख्त्त खूबसरत- सा ही हो
यही एहसास सलोना है,
ग़म में नहीं रोना है
अब ग़म में नहीं रोना है!

बादलों से घिरे आकाश में
सूरज की किरणों-सा रोशन होना है,
कांटों में खिलती कलियों- सा
खुद भी मजबूत होना है,
ग़म में नहीं रोना है
अब ग़म में नहीं रोना है!

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इस प्रतियोगिता की दुनिया में
कुछ अलग – सा होना है
मुश्किल-से-मुश्किल मंज़र में
हिम्मत को नहीं खोना है
ग़म में नहीं रोना है
अब ग़म में नहीं रोना है!

अश्कों के मोतियों को
खुशियों से पिरोना है
ग़म में नहीं रोना है
अब ग़म में नहीं रोना है!

Poetry By: Sakshi Sharma