150 साल तक जिंदा रहते हैं इस समुदाय के लोग, 90 की उम्र में भी महिलाएं हो जाती है गर्भवती

पाकिस्तान के हुंजा घाटी में हुंजा समुदाय के लोग शारीरिक तौर पर काफी मजबूत होते हैं और उन्हें शायद ही अस्पताल जाने की जरूरत होती है। सबसे हैरान करने वाली बात, तो ये है कि यहां के लोगों का औसत जीवनकाल लगभग 150 साल माना जाता है। इस समुदाय के अनोखे तौर-तरीकों पर कई किताबें भी लिखी जा चुकी हैं।

 
150 साल तक जिंदा रहते हैं इस समुदाय के लोग, 90 की उम्र में भी महिलाएं हो जाती है गर्भवती

New Delhi: अनियमित जीवनशैली (Lifestyle) के कारण दुनियाभर में ज्यादातर लोग शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान की एक घाटी में इन सब समस्याओं (Hunza Community) से काफी दूर है।

पाकिस्तान के हुंजा घाटी में हुंजा समुदाय (Hunza Community) के लोग शारीरिक तौर पर काफी मजबूत होते हैं और उन्हें शायद ही अस्पताल जाने की जरूरत होती है। सबसे हैरान करने वाली बात, तो ये है कि यहां के लोगों का औसत जीवनकाल लगभग 150 साल माना जाता है। इस समुदाय के अनोखे तौर-तरीकों पर कई किताबें भी लिखी जा चुकी हैं।

नोमैडिक वेबसाइड के मुताबिक, इस समुदाय (Hunza Community) की महिलाएं 60 से 90 साल की उम्र तक बिना किसी परेशानी के गर्भवती हो सकती हैं। इतना ही नहीं इस खास समुदाय की महिलाएं दुनिया की सबसे खूबसूरत कही जाती हैं। हुंजा समुदाय की औरतें दुनिया में सबसे खूबसूरत मानी जाती हैं। हुंजा समुदाय के लोगों को बुरुशो भी कहते हैं। ये बुरुशास्की भाषा बोलते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि हुंजा समुदाय के लोग पाकिस्तान के अन्य समुदाय के लोगों से कहीं ज्यादा शिक्षित हैं। हुंजा घाटी में इनकी संख्या 85 हजार से भी ज्यादा हैं। यह समुदाय मुस्लिम धर्म को मानता है और इनके सारे क्रियाकलाप भी मुस्लिमों जैसे ही हैं।

बता दें कि हुंजा घाटी पाकिस्तान के मशहूर पर्यटन स्थलों में से एक है। दुनियाभर से लोग यहां पहाड़ों की खूबसूरती देखने आते हैं। इस समुदाय के ऊपर कई किताबें भी लिखी जा चुकी हैं, जिसमें 'द हेल्दी हुंजाज' और 'द लॉस्ट किंगडम ऑफ द हिमालयाज' शामिल हैं।

हुंजा समुदाय के लोगों की जीवनशैली ही उनके लंबे जीवन का राज है। ये लोग सुबह पांच बजे उठ जाते हैं। यहां के लोग साइकिल या गाड़ियों का इस्तेमाल बहुत कम ही करते हैं और पैदल ज्यादा चलते हैं।

इस खास समुदाय के लोग आमतौर पर जौ, बाजरा, कुट्टू और गेहूं का आटा ही खाते हैं, जो इन्हें शारीरिक तौर पर मजबूत बनाने में काफी मदद करता है। कहते हैं कि ये लोग मांस का सेवन बहुत कम ही करते हैं। किसी खास अवसर पर ही यहां मांस बनता है, लेकिन उसमें भी ये लोग बहुत हिसाब से ही खाते हैं।

FROM AROUND THE WEB