देवदूत बनी महिलाएं, गर्भवती को कंधों पर उठाकर पहुंचाया अस्पताल.. हर कोई कर रहा तारीफ

Pregnant Woman on Chair in Kullu
New Delhi: हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में स्वास्थ्य (Health) और सड़क सुविधाओं का खासा अभाव है। आलम यह है कि कंधों पर मरीजों को मुख्य सड़क के बाद अस्पताल (Pregnant Woman on Chair in Kullu) पहुंचाया जा रहा है।

सूबे के दुर्गम इलाकों में हालात खराब हैं। ताजा मामला हिमाचल के कुल्लू (Kullu) जिले का है। 18 किमी तक गर्भवती (Pregnant) को कुर्सी पर कंधों के सहारे महिलाओं ने सड़क तक पहुंचाया (Pregnant Woman on Chair in Kullu) और फिर वहां से अस्पताल ले गए।

महिलाओं ने कंधे पर उठाया

जानकारी के अनुसार, कुल्लू ज़िला की सैंज घाटी के अति दुर्गम क्षेत्र गाड़ापारली पंचायत के शाकटी, मरौड और शुगाड़ में आजादी के 72 साल भी सड़क सुविधा का अभाव है। गांव में गर्भवती महिला सुनीता (27) को इमरजेंसी में 18 किलोमीटर कुर्सी में बांधकर महिलाओ ने कंधों पर उठाकर बड़ी मशक्कत के 8 घँटे उठाकर निहारानी तक पहुँचाया। यहां से वाहन से फिर महिला को बंजार अस्पताल पहुँचाया गया।

सुबह शुरू हुई प्रसव पीड़ा

रविवार सुबह गर्भवती सुनीता को प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो परिजन परेशान हो गए। इस दौरान उन्होंने गांववालों से मदद मांगी। लोगों ने कुर्सी पर डंडे बांधे और फिर गर्भवती को कंधों पर उठाया और अस्पताल की ओर चल पड़े।

यह बोले लोगपंचायत प्रधान भाग चंद, उप प्रधान गोपाल, बीडीसी सदस्य जयवंती देवी, शेर सिंह, हीरा चंद, डोला राम, लग्न राणा, मोती राणा, तीर्थ राम, धर्म पाल, गोविंद राम और पूर्व प्रधान इन्द्रू ने बताया कि 3 गांव के ग्रामीणों को सड़क सुविधा के अभाव में परेशानी झेलनी पड़ रही है। सरकारें आई और गई, लेकिन दुर्गम क्षेत्र गाड़ा पारली पंचायत के आधा दर्जन गांव मूलभूत सुविधाओं से दूर हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार दुर्गम क्षेत्रों में विकास करवाए, ताकि लोगों के पीठ का बोझा उतरे और बीमारी की हालत में लोगों को वाहनों की सुविधा मिल सकें। बता दें कि इस इलाके से कंधों पर मरीज ले जाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।