Dev Uthani Ekadashi: साल की सबसे शुभ एकादशी है आज, शाम तक भूलकर भी ना करें ये 5 काम

Dev Uthani Ekadashi
New Delhi: सभी 24 एकादशी में सबसे शुभ और मंगलकारी एकादशी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की देवोत्थान एकादशी (Devutthana Ekadashi 2019) मानी जाती है। इस एकादशी को देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi), देवप्रबोधिनी एकादशी और डिठवन एकादशी भी कहते हैं। इस बार यह एकादशी 8 नवंबर को है।

मान्यता है इस दिन भगवान विष्णु जो पिछले 4 महीनो से क्षीर सागर में सोए हुए थे वह जागते हैं। भगवान के जागते ही 4 महीनों से रूके हुए सभी तरह के मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाएंगे। सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाने वाली इस एकादशी (Dev Uthani Ekadashi)का व्रत करने वालों को स्वर्ग और बैकुंठ की प्राप्ति होती है।

शास्त्रों में देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi)पर कुछ उपाय करने से जहां मोक्ष की प्राप्ति होती है तो वहीं बताए गए नियम का पालन ना करने पर दुर्भाग्य का सामना करना पड़ता है।

देवोत्थान एकादशी पर करें ये काम

देवोत्थान एकादशी के दिन ही भगवान विष्णु नींद से जागते हैं जिसकी खुशी और स्वागत में सभी देवी-देवता दीप उत्सव मनाते हैं। ऐसे में इस दिन भगवान की विशेष कृपा पाने के लिए अपने घर पर दीप जरूर जलाएं।

देवोत्थान एकादशी के दिन भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप और तुलसी का विवाह होता है। ऐसे में दिन तुलसी पूजा का विशेष महत्व हो जाता है।

देवोत्थान एकादशी पर ना करें ये काम

1: शास्त्रों में सभी 24 एकादशियों में चावल खाने को वर्जित बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि एकादशी के दिन चावल खाने से मनुष्य रेंगने वाले जीव की योनि में जन्म लेता है इसलिए इस दिन भूलकर भी चावल का सेवन न करें।

2: एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की आराधना और उनके प्रति समर्पण के भाव को दिखाता है। एकादशी के दिन खान-पान और व्यवहार में संयम और सात्विकता का पालन करना चाहिए।

3: एकादशी के दिन संयम के साथ पति-पत्नी को ब्रह्राचार्य का पालन करना चाहिए इसलिए इस दिन शारीरिक संबंध नहीं बनना चाहिए।

4: सभी तिथियों में एकादशी कि तिथि बहुत शुभ मानी गई है। एकादशी का लाभ पाने के लिए इस दिन किसी को कठोर शब्द नहीं कहना चाहिए। लड़ाई-झगड़ा से बचना चाहिए।

5: एकादशी का दिन भगवान की आराधना का दिन होता है इसलिए इस दिन सुबह जल्दी उठ जाना चाहिए और शाम के वक्त सोना भी नहीं चाहिए। इसके अलावा इस दिन न तो क्रोध करना चाहिए और न ही झूठ बोलना चाहिए।