गंगा दशहरा 2019: यहां गिरी थी अमृत की बूंद, आज के दिन जरूर करें इन स्‍थानों के दर्शन

Ganga Dusshera 2019 Har Ki paidi
New Delhi: सनातन धर्म के त्‍योहारों में गंगा दशहरा (Ganga Dussehra 2019) का बहुत ही महत्‍व है। यही वजह है कि पूरे देश में इस मौके पर गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगता है।

लेकिन कुछ खास जगहों पर गंगा दशहरा (Ganga Dussehra 2019) के लिए पूरे भारत के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचते हैं। अगर आप भी गंगा दशहरा पर जाने के लिए सोच रहें तो इन जगहों पर जा सकते हैं। यहां पर जाकर गंगा दशहरा का अद्भुत रूप देखने को मिलता है। तो आइए जानते हैं इन स्‍थानों के बारे में…

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उत्‍तर प्रदेश में बसी शिव की नगरी यानी कि वाराणसी में हर साल गंगा दशहरा के मौके पर लाखों की संख्‍या श्रद्धालु आते हैं और मां गंगा में स्‍नान कर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। वाराणसी में 87 घाट हैं, जिनका अपना-अपना महत्‍व है। विद्वान कहते हैं कि काशी में गंगा स्‍नान का विशेष महत्‍व है।

हरिद्वार

हरिद्वार में गंगा का विशेष महत्‍व माना गया है। यहीं से गंगा नदी पहाड़ी क्षेत्रों को छोड़ते हुए मैदानी क्षेत्रों में प्रवेश करती है। इसके अलावा विद्वान बताते हैं कि समुद्र मंथन के दौरान यहां पर अमृत की बूंदें गिरी थीं, इसकी वजह से ही यहां पर हर 12 साल के बाद कुंभ का आयोजन होता है। यही वजह है कि हरिद्वार में गंगा दशहरा का महत्‍व और भी बढ़ जाता है।

ऋषिकेश

ऋषिकेश में भी गंगा दशहरा के अवसर पर लाखों की संख्‍या में श्रद्धालु डुबकी लगाते हैं। कहा जाता है कि कि इस स्‍थान पर सनातन धर्म की तीन प्रमुख नदियों गंगा, यमुना और सरस्‍वती का मिलन यानी संगम होता है। इसी जगह से गंगा नदी दायीं ओर मुड़ जाती है। यहां हर शाम मां गंगा की विशेष पूजा-आरती का आयोजन होता है।

गढ़मुक्‍तेश्‍वर

गंगा किनारे बसे गढ़मुक्‍तेश्‍वर में मां गंगा का मंदिर भी बना है। इसके अलावा गंगा दशहरा के मौके पर यहां विशाल स्‍तर पर मेले का आयोजन किया जाता है। इसमें शामिल होने के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचते हैं और मां गंगा में डुबकी लगाकर मोक्ष प्राप्ति का आर्शीवाद मांगते हैं।

इलाहाबाद

संगम नगरी यानी कि गंगा, यमुना और अदृश्‍य सरस्‍वती का मिलन होने वाली नगरी इलाहाबाद में गंगा दशहरा बहुत ही खास होता है। क्‍योंकि यहां कुंभ का भी आयोजन होता है तो इसका महत्‍व और भी बढ़ जाता है। यही वजह है कि गंगा दशहरा के मौके पर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।

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नोट: हमारा उद्देश्य किसी तरह के अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है। यह लेख लोक मान्यताओं और पाठकों की रुचि को ध्यान में रखकर लिखा गया है।