पाकिस्तान में स्थित हैं ये 4 पौराणिक मंदिर, जहां मुस्लिम भी रखते हैं आस्था

Hindu Temple in Pakistan
New Delhi: ब्रह्मांड के सबसे प्राचीन सनातन धर्म को मानने वाले सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में फैले हुए हैं। यहां तक की हमारे चिर-प्रतिद्वंधी देश पाकिस्तान में भी कई पौराणिक हिंदू मंदिर (Hindu Temples in Pakistan) आज भी मौजूद हैं, जिनमें रोजाना हजारों भक्त दूर-दूर से अपनी फरियाद लेकर आते हैं।

आज हम आपको कुछ ऐसे ही मंदिरों के बारे में बता रहे हैं मुस्लिम बहुल देश में स्थित होने के बावजूद हिंदुत्व की गाथा गा रहे हैं…

यह भी पढ़े: भगवान विष्णु के 10 प्रसिद्ध मंदिर…जिनके दर्शन करने देश-विदेश से आते हैं श्रद्धालु

हिंगलाज माता मंदिर

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में जब भी हिंदू मंदिरों की बात की जाती है तो इनमें सबसे पहला नाम आद्याशक्ति के हिंगलाज माता मंदिर लिया जाता है। देवी शक्ति के 51 शक्तिपीठों में से एक यह धाम पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित है। इस शक्तिपीठ की देखभाल हिंदू समुदाय के साथ मुस्लिम भी करते हैं। मुस्लिम समुदाय के लोग इसे चमत्कारिक स्थान मानते हैं। पाकिस्तान में मुसलमान देवी हिंगलाज को नानी का मंदिर और नानी का हज भी कहते हैं। इस स्थान पर आकर हिंदू और मुसलमान का भेदभाव मिट जाता है। दोनों ही समुदाय के लोग यहां भक्तिपूर्वक माता की पूजा करते हैं।

कराची का हनुमान मंदिर

माता के शक्तिपीठ के अलावा पाकिस्तान में हनुमानजी एक प्राचीन मंदिर भी स्थित है। 17 लाख साल पुराने इस मंदिर से जुड़ी मान्यता यह है कि यहां से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं जाता। मंगलवार और शनिवार के दिन यहां विशेष आकर्षण देखने को मिलता है। मंदिर की महिमा को इस बात से जाना जा सकता है कि यहां न सिर्फ पाकिस्तानी हिंदू बल्कि भारत से भी श्रद्धालु इस मंदिर में बजरंगबली के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। संकटमोचक के इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां बालाजी की प्रतिमा जमीन से प्रकट हुई थी।

कटासराज मंदिर

पाकिस्तान में स्थित भगवान शिव का प्राचीन कटासराज मंदिर भी देश-दुनिया में बसे तमाम हिंदुओं की आस्था का मुख्य केंद्र है। पंजाब प्रान्त के चकवाल जिले में स्थित भोलेनाथ के इस मंदिर का निर्माण 6-9 शताब्दी के बीच माना जाता है। भगवान शिव का यह पौराणिक मंदिर कटस नामक पहाड़ी पर स्थित है। मान्यता है कि महाभारत काल में यक्ष और युद्धिष्ठिर की बीच यहीं पर संवाद हुआ था। एक अन्य मान्यता के अनुसार, यह मंदिर भगवान शिव के आंसुओं से बना है। जो कभी सती की मृत्यु के बाद दु:खी भगवान शिव के आंसुओं से भरा था। यहां पर आने वाला श्रद्धालु इस पावन कुंड में तन और मन के सुख की कामना करता हुआ जरूर स्नान करता है।

यह भी पढ़े: रामायण के अनुसार 4 आदतों वाला इंसान कितनी भी मेहनत कर ले..कभी अमीर नहीं बन सकता

माता गौरी का मंदिर

पाकिस्तान में हिंगलाज शक्तिपीठ के अलावा एक और शक्तिपीठ मौजूद है। माता गौरी नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर हिंदुओं की आस्था का तीसरा बड़ा तीर्थ स्थल है। सिंध प्रांत के थारपारकर जिले में स्थित माता के इस मंदिर के पास चमत्कारी कुंआ है, जिसके बारे में मानना है कि मां गौरी के आर्शीवाद से यह कभी नहीं सूखता है।