रामायण के अनुसार हर पति पत्नी को पता होनी चाहिए अपने रिश्ते से जुड़ी ये 6 महत्वपूर्ण बातें

Ramayana
New Delhi: रामायण (Ramayana) के अनुसार हर पति-पत्नी (Husband Wife Relation According to Ramayana) को अपने रिश्ते से जुड़ी कुछ खास जिम्मेदारियां और अधिकार पता होने चाहिए।

रामायण (Ramayana) के बारे में जानने के बाद कई लोगों को लगता है कि श्रीराम और सीता का वैवाहिक जीवन अच्छा नहीं था। उनके जीवन में सुख नहीं था, लेकिन ये बात गलत है। श्रीराम और सीता को भौतिक सुख जरुरत नहीं थी। उन्होने तो बस अपने कर्तव्य और अधिकारों को ठीक से समझा। जिससे थोड़े समय में ही वैवाहिक जीवन का सुख बहुत ज्यादा मिला। श्रीराम और सीता का रिश्ते को देखकर हमें भी कुछ बातें सीखनी चाहिए।

रामायण (Ramayana) के अनुसार पति-पत्नी का रिश्ता कुछ ऐसा होना चाहिए

1: रामायण के अनुसार सीता से विवाह कर के भगवान श्रीराम ने सफल वैवाहिक जीवन की नींव रखी। सीता को भगवान राम ने विवाह के बाद उपहार के रुप में वचन दिया कि जिस तरह से दूसरे राजा कई रानियां रखते हैं, कई विवाह करते हैं, वे ऐसा कभी नहीं करेंगे। हमेशा सीता के प्रति ही निष्ठा रखेंगे।

2: रामायण के अनुसार विवाह के पहले ही दिन एक दिव्य विचार आया। रिश्ते में भरोसे और आस्था का संचार हो गया। सफल गृहस्थी की नींव पड़ गई। श्रीराम ने अपना यह वचन निभाया भी। सीता को ही सारे अधिकार प्राप्त थे। श्रीराम ने उन्हें कभी कमतर नहीं आंका।

3: रामायण कहती है कि पत्नी से ही सारी अपेक्षाएं करना और पति को सारी मर्यादाओं एवं नियम-कायदों से छूट देना बिल्कुल भी निष्पक्ष और न्यायसंगत नहीं है। पति-पत्नी का संबंध तभी सार्थक है जबकि उनके बीच का प्रेम सदा तरोताजा बना रहे। तभी तो पति-पत्नी को दो शरीर एक प्राण कहा जाता है। दोनों की अपूर्णता जब पूर्णता में बदल जाती है तो अध्यात्म के मार्ग पर बढऩा आसान और आंनदपूर्ण हो जाता है।

4: रामायण में बताया है कि स्त्री में ऐसे कई श्रेष्ठ गुण होते हैं जो पुरुष को अपना लेना चाहिए। प्रेम, सेवा, उदारता, समर्पण और क्षमा की भावना स्त्रियों में ऐसे गुण हैं, जो उन्हें देवी के समान सम्मान और गौरव प्रदान करते हैं।

5: रामायण में जिस प्रकार पतिव्रत की बात हर कहीं की जाती है, उसी प्रकार पत्नीव्रत भी उतना ही आवश्यक और महत्वपूर्ण है। जबकि गहराई से सोचें तो यही बात जाहिर होती है कि पत्नी के लिये पति व्रत का पालन करना जितना जरूरी है उससे ज्यादा आवश्यक है पति का पत्नी व्रत का पालन करना। दोनों का महत्व समान है। कर्तव्य और अधिकारों की दृष्टि से भी दोनों से एक समान ही हैं।

6: रामायण के अनुसार जो नियम और कायदे-कानून पत्नी पर लागू होते हैं वही पति पर भी लागू होते हैं। ईमानदारी और निष्पक्ष होकर यदि सोचें तो यही साबित होता है कि स्त्री पुरुष की बजाय अधिक महत्वपूर्ण और सम्मान की हकदार है।