भाई-बहन के साथ मौसी के घर पहुंचे भगवान जगन्नाथ, जानें कैसा है गुंडिचा मंदिर

Lord Jagannath Gundicha
New Delhi: पुरी में विश्वप्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा (Jagannath Rath Yatra 2019) गुरुवार को शुरू हुई। जिसमें भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर पहुंचे। वहां उन तीनों का पादोपीठा का भोग लगाकर स्वागत हुआ।

अब भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) अपनी मौसी के घर सात दिनों तक विश्राम करेंगे, जहां पर उन तीनों का विधि विधान से आदर सत्कार किया जाएगा। सात दिनों के बाद वे अपने भाई-बहन के साथ वापस पुरी के जगन्नाथ मंदिर में लौट (Jagannath Rath Yatra 2019) आएंगे। इस वापसी यात्रा को बाहुड़ा यात्रा कहा जाता है।

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गुंडिचा मंदिर: भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर

1. गुंडिचा मंदिर को भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) की मौसी का घर भी कहा जाता है। यह मंदिर भगवान जगन्नाथ के मंदिर से लगभग 3 किमी दूर है। यह मंदिर कलिंग वास्तुकला का जीता जगता उदाहरण है।

2. रथ यात्रा (Jagannath Rath Yatra 2019) के संदर्भ में इस गुंडिचा मंदिर का महत्व काफी है, क्योंकि भगवान जगन्नाथ यहां पर विश्राम करने आते हैं। इस मंदिर के शीर्ष पर भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र बना हुआ है।

3. गुंडिचा मंदिर में दो प्रमुख द्वार हैं। प्रश्चिमी द्वार से भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) मंदिर में प्रवेश करते हैं, फिर विश्राम के बाद वे पूर्वी दरवाजे से अपने धाम श्रीमंदिर के लिए प्रस्थान करते हैं।

4. गुंडिचा मंदिर के 4 प्रमुख भाग हैं: विमान, जगमोहन, नाटा-मंडप और भोग मंडप। विमान वाले हिस्से में गर्भगृह है, जगमोहन वाला हिस्सा सभागार है, नाटा-मंडप उत्सव सभागार है और भोग मंडप में श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ को प्रसाद अर्पित करते हैं।

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5. गुंडिचा मंदिर में रथ यात्रा (Jagannath Rath Yatra 2019) के समय ही अत्यधिक संख्या में श्रद्धालु आते हैं, अन्यथा इस मंदिर में वर्ष भर सामान्य संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इस मंदिर की देखभाल जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ही करता है।

6. गुंडिचा मंदिर में रथ यात्रा के पांचवे दिन हेरा पंचमी होती है। इस दिन श्रीमंदिर से भगवान जगन्नाथ की पत्नी लक्ष्मी माता गुंडिचा मंदिर में सुवर्ण महालक्ष्मी के रूप में आती हैं। उनको श्रीमंदिर से पालकी में लेकर गुंडिचा मंदिर लाया जाता है, जहां पर पुरोहित उनको गर्भ गृह में लेकर जाते हैं और भगवान जगन्नाथ से उनका मिलन कराते हैं। सुवर्ण महालक्ष्मी भगवान जगन्नाथ से अपने धाम श्रीमंदिर यानी पुरी के प्रमुख मंदिर में वापस चलने का निवेदन करती हैं।

7. भगवान जगन्नाथ उनके निवदेन को स्वीकार कर माता लक्ष्मी को अपनी सहमति के तौर पर एक माला देते हैं। फिर शाम को माता लक्ष्मी गुंडिचा मंदिर से वापस श्रीमंदिर में आ जाती हैं। मुख्य मंदिर में वापस लौटने से पूर्व वह नाराज होकर अपने एक सेवक को आदेश देती हैं कि वह जगन्नाथ जी के रथ नंदीघोष का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त कर दे। इसे रथ भंग कहा जाता है।