माता सीता को मुंह दिखाई में मिला था यह महल, आज प्रसिद्ध मंदिरों में होती है गिनती

Lord Ram
New Delhi: अयोध्या भगवान राम (Lord Ram) की जन्मस्थली है। रामचरित मानस के अनुसार त्रेतायुग में भगवान विष्णु ने राम के रूप में यहां अवतार लिया था और राक्षसों के आतंक से मनुष्यों की रक्षा करके धर्म की स्थापना की थी। सरयू नदी के तट पर बसे अयोध्या नगरी पर भगवान राम ने कई वर्षों तक राज भी किया था और सरयू नदी में प्रवेश करके अपने मानव शरीर का त्याग किया था।

अयोध्या में आज भी कई ऐसे स्थल हैं जिनका संबंध भगवान राम से बताया जाता है। लेकिन एक मंदिर ऐसा है जिसके बारे में कहा जाता है कि द्वापर युग में जब भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लिया तो उन्होंने देवी सीता और भगवान राम (Lord Ram) के मंदिर का निर्माण करवाया। ऐसी कथा है कि इस मंदिर में जो प्राचीन विग्रह है वह रामायण कालीन है। आइए जानते हैं अयोध्‍या के प्राचीन मंदिर और उनके बारे में लोकप्रिय रोचक बातें।

माता सीता को मुंह दिखाई में मिला था यह भवन

इस मंदिर का जो वर्तमान स्वरूप है वह सन् 1891 का है, जिसका निर्माण ओरछा के राजा सवाई महेन्द्र प्रताप सिंह की पत्नी महारानी वृषभानु कुमारी की देखरेख में हुआ। इससे पहले भी कई बार इस मंदिर का निर्माण और जीर्णोद्धार हो चुका है। दरअसल पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कनक भवन मंदिर जिस स्थान पर बना हुआ है वहां पर देवी सीता का भवन हुआ करता था जो विवाह के बाद मुंह दिखाई में इन्हें अपनी सासु मां कैकेयी से मिला था।

श्रीकृष्ण ने बनवाया था राम और देवी सीता का मंदिर

जब भगवान राम और देवी सीता अपने लोक को चले गए और इनके पुत्र कुश अयोध्या के राजा हुए तो इन्होंने इस भवन में देवी सीता और भगवान राम की मूर्ति स्थापित करके इस भवन को मंदिर बना दिया। कालांतर में अयोध्या नगरी के पराभव के साथ यह मंदिर भी ढह गया। विक्रमादित्य कालीन एक शिलालेख में बताया गया है कि त्रेतायुग में जरासंध वध के बाद भगवान श्रीकृष्ण जब तीर्थाटन करते हुए अयोध्या पहुंचे तो कनक भवन के टीले के पास एक पद्मासना देवी को तपस्या करते देखा तो श्रीकृष्ण ने यहां पर कनक भवन का फिर से निर्माण करवाया और मूर्तियों को स्थापित करवाया। कालांतर में कई बार इस मंदिर का निर्माण और जीर्णोद्धार होता रहा है।

राम की पैड़ी का महत्व

अयोध्या में सरयू नदी के तट पर घाटों की एक श्रृंखला है, जिसे राम की पैड़ी कहते हैं। एक बार लक्ष्मणजी तीर्थाटन पर जाना चाह रहे थे, तब सरयू तट पर भगवान राम ने एक लीला दिखाई और बताया कि हर दिन सूर्योदय से पूर्व यहां सभी तीर्थ स्नान के लिए आते हैं। इसलिए सरयू नदी में स्नान करने मात्र से सभी तीर्थों में स्नान का पुण्य प्राप्त हो जाता है। इसलिए मान्यता है कि यहां नदी में डुबकी लगाने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिल जाती है।

छोटी देवकाली मंदिर का महत्व

इस मंदिर का संबंध भगवान राम और देवी सीता के विवाह से है। मान्यताओं के अनुसार देवी सीता विवाह के बाद जब अयोध्या आईं तो अपने साथ देवी गिरिजा की एक मूर्ति भी साथ लाई थीं। राजा दशरथजी ने देवी सीता के गिरिजा माता के लिए इस स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाया था। यहां देवी सीता गिरिजा माता की पूजा किया करती थीं।

त्रेता के ठाकुर का मंदिर, कहलाते हैं कालाराम

रामायण में भगवान राम के अश्वमेध यज्ञ जिक्र हुआ है। कहते हैं जिस स्थान पर भगवान राम ने अश्वमेध यज्ञ संपन्न किया था उसी स्थान पर यह मंदिर बना है। इसे कालाराम का मंदिर भी कहा जाता है क्योंकि इस मंदिर में भगवान राम की प्रतिमा काले बालू पत्थर की है। भगवान राम के साथ मंदिर में उनके भाई, हनुमान, देवी सीता और गुरुजन भी मौजूद हैं। इस मंदिर का कपाट साल में केवल एक दिन कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी देवप्रबोधिनी के दिन खुलता है।

यहां मां की गोद में विराजते हैं हनुमानजी

अयोध्या के प्रमुख मंदिरों में से एक है हनुमान गढ़ी का हनुमान मंदिर। कहते हैं कि अयोध्या की रक्षा के लिए भगवान राम ने यहां पर हनुमानजी को विराजमान रहने के लिए कहा था। हनुमानजी के मंदिर में माता अंजनी की प्रतिमा है, जिनकी गोद में बाल हनुमान विराजमान हैं।

नागेश्वरनाथ मंदिर की यह है खास बात

अयोध्या में एक प्राचीन शिव मंदिर है नागेश्वरनाथ। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां पर भगवान राम के पुत्र कुश ने शिव मंदिर का निर्माण करवाया था। इसके पीछे कथा है कि एक बार कुश सरयू नदी में स्नान कर रहे थे। संयोगवश उनका बाजूबंद नदी में गिर गया, जिसे नागकन्या ने उठा लिया। नागकन्या भगवान शिव की भक्त थीं। उसी नागकन्या के लिए कुश ने इस मंदिर का निर्माण करवाया।