भगवान शिव के 5 विशाल शिवलिंग….जिनके दर्शन मात्र से दूर हो जाते हैं भक्तों के दुख-दर्द

Shiva
New Delhi: त्रिमूर्ति में प्रमुख देव भगवान शिव (Lord Shiva) इकलौते ऐसे देव हैं, जिनकी पूजा लिंग रूप में भी की जाती है। इसलिए लगभग सभी शिव मंदिरों में शिवलिंग स्थापित किया जाता है।

भगवान शिव के प्रतीक कहे जाने वाले शिवलिंग का वर्णन शिवपुराण, वायुपुराण और रामायण जैसे धर्म ग्रन्थों में भी पढ़ने को मिलता है। रामायण में उल्लेखित कथा के अनुसार, जब भगवान श्रीराम रावण का वध करके लंका से वापस लौटे तो उन्होंने भी शिवलिंग (Highest Shivling) का निर्माण कर रामेश्वरम धाम की स्थापना की थी।

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एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में शिवजी (Lord Shiva) ने शिवलिंग रूप में ही प्रकट होकर अपने विस्तार का ज्ञान भगवान विष्णु और ब्रह्माजी को दिया था।

आज हम आपको भगवान शिव के ऐसे 5 शिवलिंगों (Highest Shivling) के बारे में बता रहे हैं, जो अपने विशाल आकार और भव्यता के लिए देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं…

कोटिलिंगेश्‍वर मंदिर

दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य के कोलार जिले में स्थित कोटिलिंगेश्वर धाम मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर दुनिया के सबसे ऊंचे शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। इस विशाल शिवलिंग के चारों ओर छोटे-छोटे लाखों शिवलिंग भी मौजूद हैं, जो शिव के प्रति उनके भक्तों की भक्ति की अनूठी कहानी सुनाते हैं। 108 फीट ऊंचे इस विशाल शिवलिंग के सामने विशाल नंदी महाराज भी विराजमान हैं।

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हरिहर धाम मंदिर

देवों के देव महादेव का दूसरा सबसे बड़ा शिवलिंग झारखंड के गिरिडीह में स्थित है। हरिहर धाम नाम से मशहूर इस मंदिर में 65 फीट ऊंचा शिवलिंग स्‍थापित है। यहां सावन पूर्णिमा के अवसर पर भक्‍तों का तांता लगता है। इसके अलावा हरिहर धाम में भक्त विवाह के बंधन में बंधने के लिए भी दूर-दूर सी आते हैं। भोलेनाथ के इस धाम में विवाह की यह परंपरा सालों से चली आ रही है।

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सिद्धेश्‍वर नाथ मंदिर

भोलेनाथ का तीसरा सबसे बड़ा शिवलिंग अरुणाचल प्रदेश के जीरो में स्थित है। सिद्धेश्‍वर नाथ मंदिर नाम से प्रसिद्ध इस धाम में 22 फीट ऊंचा शिवलिंग विराजमान है। यहां विघ्‍नहर्ता गणेश और मां पार्वती की अनुपम प्रतिमा है।

बृहदेश्वर मंदिर तमिलनाडु

तमिलनाडु में भगवान शिव का तीसरा सबसे बड़ा शिवलिंग बृहदेश्वर मंदिर में स्थित है। यहां विराजमान 13.5 फीट ऊंचा शिवलिंग का निर्माण एक ही पत्‍थर से किया गया है। मंदिर में प्रवेश द्वार पर नंदी महाराज भी स्‍थापित हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मंदिर की रोशनी बंद होने के बाद भी भक्‍त शिवलिंग के दर्शन आसानी से कर सकते हैं। दरअसल, सूर्य की रोशनी सीधे नंदी बाबा पर पड़ती है जिसका रिफ्लेक्‍शन सीधे शिवलिंग पर गिरता है और इस तरह से शिवलिंग के दर्शन होते हैं।

अमरेश्‍वर महादेव मंदिर

महाकाल की भूमि मध्‍यप्रदेश के अनूपपुर में स्थित अमरेश्‍वर महादेव मंदिर में 11 फीट ऊंचा शिवलिंग विराजमान हैं। इस मंदिर की एक खास बात यह भी है कि यहां सभी 12 ज्‍योतिर्लिगों के दर्शन किए जा सकते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थान नर्मदा नदी का उद्गम स्थल भी माना जाता है।