सामने आई बाबा बर्फानी की पहली तस्वीर, जानें क्या है भोलेनाथ की अमरनाथ यात्रा का महत्व

Amarnath Jyotirling
New Delhi: भगवान शिव (Lord Shiva) की पवित्र अमरनाथ गुफा (Amarnath Cave) में बर्फ से बने प्राकृतिक शिवलिंग की पहली तस्वीर सामने आई है। इस साल पूर्ण आकार में बना शिवलिंग भक्तों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र है।

अमरनाथ यात्रा 1 जुलाई से शुरू होकर 15 अगस्त तक चलेगी यानी श्रद्धालु 46 दिन तक बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकेंगे। श्रीनगर से लगभग 145 किलोमीटर की दूर अमरनाथ गुफा (Amarnath Cave) को प्राचीनकाल में ‘अमरेश्वर’ नाम से जाना था। समुद्रतल से 3,978 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह गुफा 160 फुट लंबी,100 फुट चौड़ी है।

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आइए जानते हैं अमरनाथ गुफा से जुड़े महत्व और रहस्यों के बारे में…

हिम शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं भगवान शिव

अमरनाथ गुफा का महत्व सिर्फ इसलिए नहीं है कि यहां हिम शिवलिंग का निर्माण होता है, बल्कि इसलिए भी है क्‍योंकि इसी गुफा में भगवान शिव ने देवी पार्वती को अमरत्व का मंत्र सुनाया था।

पंचतरणी में किया पांचों तत्‍वों का परित्‍याग

पौराणिक मान्यतों के अनुसार, शिवजी जब पार्वती को अमरकथा सुनाने ले जा रहे थे, तब उन्होंने रास्ते में पहलगाम में अपने वाहन नंदी (बैल), चंदनबाड़ी में अपनी जटा से चंद्रमा, शेषनाग नामक झील पर गले से नाग और महागुणस पर्वत पर प्रिय पुत्र श्रीगणेश का परित्याग किया था। इसके बाद पंचतरणी नामक स्थान पर भगवान शिव ने पांचों तत्वों का त्याग किया।

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बाबा अमरनाथ के दर्शन जीवन होता है सफल

धर्मग्रन्थों के अनुसार अमरनाथ गुफा में भगवान शिव ने पार्वती को अमर होने का रहस्य बताया था। देवी पार्वती के साथ ही इस रहस्य को शुक (तोता) और दो कबूतरों ने भी सुन लिया था. यह शुक बाद में शुकदेव ऋषि के रूप में अमर हो गए, जबकि गुफा में आज भी कई श्रद्धालुओं को कबूतरों का एक जोड़ा दिखाई देता है जिन्हें अमर पक्षी माना जाता है।

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पार्वती पीठ भी यहीं स्थित है

हिम शिवलिंग के अलावा यहां गुफा के ऊपर पर्वत पर श्रीराम कुंड भी स्थित है। साथ ही अमरनाथ गुफा में 51 शक्तिपीठों में से एक पार्वती पीठ भी है। मान्यता है कि यहां देवी सती का कंठ गिरा था।