नीलकंठ महादेव मंदिर: जहां भगवान शिव ने पिया था समुद्र मंथन से निकला विष

Neelkanth Mahadev Mandir
New Delhi: देवभूमि उत्तराखंड में ऋषिकेश के पास मणिकूट पर्वत पर भगवान शिव का नीलकंठ महादेव मंदिर (Neelkanth Mahadev Temple) स्थित है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देव-दानवों के बीच हुए समुद्र मंथन के दौरान निकला हलाहल विष भगवान शिव ने इसी स्थान पर पिया था। विष पीने के बाद उनका गला नीला पड़ गया, इसलिए भोलेनाथ को नीलकंठ कहा जाता है।

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नीलकंठ महादेव मंदिर (Neelkanth Mahadev Temple) उत्तर भारत के प्रमुख शिवमंदिरों में से एक है। मान्यता के अनुसार जब भगवान शिव ने विषपान किया तो देवी पार्वती ने उसी समय शिव के गले पर हाथ लगाकर विष रोक दिया था, ताकि विष उनके पेट तक न पहुंच सके। इस तरह विष उनके गले में बना रहा।

मंदिर के पास एक झरना भी मौजूद है, जहां श्रद्धालु भोलेनाथ के दर्शन से पहले स्नान करते हैं। नीलकंठ महादेव मंदिर की नक्काशी देखते ही बनती है। इसके साथ ही यहां समुद्र मंथन के दृश्य भी देखने को मिलते हैं। वहीं, गर्भ गृह के प्रवेश-द्वार पर एक विशाल पेंटिंग में भगवान शिव को विष पीते हुए भी दिखलाया गया है।

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ऋषिकेश से स्वर्गाश्रम, लक्ष्मण झूला, नीलकंठ रोड, मौनी बाबा की गुफा से होकर आप नीलकंठ महादेव मंदिर पहुंच सकते हैं। अगर आप अपने वाहन से जाना चाहते हैं तो ऋषिकेश बैराज-लक्ष्मण झूला मार्ग से सीधे नीलकंठ जा सकते हैं। या फिर बदरीनाथ मार्ग पर ब्रह्मपुरी होते हुए नीलकंठ मार्ग पकड़ सकते हैं।

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नोट: हमारा उद्देश्य किसी तरह के अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है। यह लेख लोक मान्यताओं और पाठकों की रुचि को ध्यान में रखकर लिखा गया है।