हिंदू धर्म के लिए महत्वपूर्ण हैं ये 7 पौराणिक स्थल, हर युग से जुड़ा है इनका महत्व

Religious Places
New Delhi: पुराणों में ऐसे कई क्षेत्रों (Religious Places) का वर्णन मिलता है, जहां भगवान ने अवतार लिया या कोई सिद्ध ऋषि मुनि ने उस स्थान पर तप किया।

लेकिन आज हम आपको उन 7 प्रमुख क्षेत्रों (Religious Places) के बारे में बताने जा रहे हैं, जो कभी एक ही युग में तो कभी अलग-अलग युग में किसी घटना के कारण महत्वपूर्ण बन गए…

कुरुक्षेत्र, हरियाणा

कुरुक्षेत्र, एक ऐसा क्षेत्र और नाम, जिसके बारे में हर भारतीय को पता होता है। क्योंकि कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध लड़ा गया था। कुरुक्षेत्र हरियाणा में स्थित है। वर्तमान समय में यहां पर कई मंदिर स्थापित हैं। यह क्षेत्र हिंदू धर्म के लोगों के लिए एक तीर्थ के समान महत्वपूर्ण है।

प्रभास क्षेत्र, गुजरात

गुजरात में द्वारका के पास स्थित है सौराष्ट्र। सौराष्ट्र के प्रभास क्षेत्र की महत्ता का वर्णन स्कंदपुराण और वायुपुराण में चंद्रदेव और वेदव्यासजी की कथाओं के संबंध में मिलता है। लेकिन द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने इसी क्षेत्र में देह त्याग किया था। यही वह स्थान है, जहां यदुवंशी आपस में लड़कर अपना ही कुल समाप्त कर बैठे थे। साथ ही यही वह क्षेत्र है, जहां से शेषनाग के अवतार बलरामजी बैकुंठ को लौट गए थे।

भृगु क्षेत्र

गुजरात का भड़ोच ही प्राचीन काल का भृगु क्षेत्र है। यह महर्षि भृगु की तपस्थली है। गुजरात में नर्मदा नदी और समुद्र तट के संगम पर स्थित है यह क्षेत्र। यही वह स्थान है, जहां सतयुग में राजा बलि ने अश्वमेध यज्ञ किया था।

गया क्षेत्र, बिहार

बिहार राज्य के बोध गया के महत्व से हम सभी वाकिफ हैं। हिंदू धर्म में पितरों की मुक्ति के लिए बोध गया में पिंड दान का महत्व बताया गया है। गया क्षेत्र का नाम बोध गया भगवान बुद्ध के अवतरण के बाद पड़ा। क्योंकि इसी क्षेत्र में एक पीपल के वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हो हुई थी।

हरिक्षेत्र, बिहार

बिहार राज्य की राजधानी पटना के निकट स्थित है हरिक्षेत्र। यह क्षेत्र गंगा, सरयू, गंठकी और सोन नदी का संगम क्षेत्र भी है। इस क्षेत्र के महत्व का उल्लेख वराह पुराण में मिलता है। रामायण के अनुसार, इस क्षेत्र में ब्रह्मदेव के मानस पुत्र महर्षि पुलस्त्य ने तपस्या की थी। महर्षि पुलस्त्य रावण के दादा थे।

पुरुषोत्तमक्षेत्र, उड़ीसा

पुरुषोत्तम क्षेत्र जगन्नाथ पुरी और दक्षिण कटक के साथ वेंकटाचल तक फैला हुआ है। पुरुषोत्तम क्षेत्र के बारे में स्कंद पुराण में कहा गया है कि इस क्षेत्र में स्वयं नारायण भगवान पुरुष रूप में निवास करते हैं। इस क्षेत्र में रहकर समुद्र जल में स्नान कर ध्यान और पूजन करने से भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

नैमिष क्षेत्र, उत्तर प्रदेश

नैमिष क्षेत्र, उत्तरप्रदेश के सीतापुर जिले के पास स्थित है। गोमती नदी के तट पर पूर्व दिशा में सीतापुर से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यही वह क्षेत्र है,जहां श्रीराम ने अश्वमेध यज्ञ संपन्न किया था। नैमिष क्षेत्र का नाम ऋषियों की तपोभूमि होने कारण पड़ा। हजारो ऋषि-मुनियों के ज्ञान चक्षु इस क्षेत्र में तपस्या कर खुले। नैमिष शब्द निमिषा से बना है, जिसका अर्थ होता है नेत्रों की आभा।