Whatsapp स्पाइवेयर मामले पर CERT-In का बड़ा खुलासा- हमले से 3 दिन पहले ही दिया था अलर्ट

Israeli Spyware on WhatsApp
New Delhi: वॉट्सऐप पर हुए मैलवेयर अटैक (WhatsApp Pegasus Spyware) के बारे में एक नई जानकारी सामने आई है।

इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, CERT-In (इंडियन कंप्यूटर इमर्जेंसी रिस्पॉन्स टीम) ने सरकार को फेसबुक द्वारा इस अटैक (WhatsApp Pegasus Spyware) के बारे में अलर्ट किए जाने से तीन दिन पहले ही ऐडवाइजरी जारी कर दी थी।

मई में जारी की थी पहली ऐडवाइजरी

CERT-In, देश की नोडल साइबर सिक्यॉरिटी एजेंसी है। इसमें मैलवेयर अटैक के खतरे को इंटरनल टूल्स की मदद के पहचाना और 17 मई को वॉट्सऐप यूजर्स के लिए पहली ऐडवाइजरी जारी कर दी थी। CERT-In ने इस मैलवेयर अटैर को बेहद खतरनाक की कैटिगरी में रखते हुए कहा था कि ये वॉट्सऐप वॉइस कॉल के जरिए अटैक करेगा।

वॉट्सऐप ने भी किया था अलर्ट

मई के अंत में वॉट्सऐप ने भी इस बारे में एजेंसी को अलर्ट किया था। हालांकि, इसमें यह नहीं बताया गया था कि इस अटैक में इस्तेमाल होने वाला मैलवेयर Pegasus है। पेगासस मैलवेयर को इजरायल की सर्वेलन्स फर्म NSO Group ने डिवेलप किया है।

121 भारतीयों पर स्पाइवेयर अटैक की कोशिश

इसके कुछ महीनों बाद यानी कि सितंबर में इस अमरीकी कंपनी ने भी CERT-In को पत्र लिखकर इस स्पाइवेयर के बारे में आगाह किया था। इसमें कहा गया था कि 121 भारतीयों पर स्पाइवेयर अटैक की कोशिश की गई है और इससे वॉट्सऐप यूज करने वाले 20 भारतीय यूजर प्रभावित हुए हैं।

प्रभावित यूजर अभी भी हो सकते हैं खतरे में

वॉट्सऐप ने भारत सरकार को बताया कि उसने इस खतरे को ठीक कर दिया है। इसके साथ ही वॉट्सऐप ने यह भी वह अभी समझ नहीं पा रहा कि अटैक वाकई में हुआ है या नहीं। हालांकि, वॉट्सऐप ने अभी यह साफ नहीं किया है कि जिन यूजर्स को इस स्पाइवेयर से अटैक किया गया है वह अब इससे बाहर हैं या अभी भी इस अटैक की चपेट में हैं।

ऐप अपडेट करने की दी थी सलाह

इसी साल 15 मई को वॉट्सऐप ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया था कि उसने एक स्पाइवेयर की पहचान करने के बाद यूजर्स को वॉट्सऐप अपडेट करने की सलाह दी थी। हालांकि, वॉट्सऐप ने उस वक्त इस स्पाइवेयर का नाम नहीं बताया था। वॉट्सऐप ने कहा है कि उसने मई में ही इस स्पाइवेयर की पहचान कर इंटरनली इसे फिक्स कर दिया है।

वॉट्सऐप ने किया केस

29 अक्टूबर को वॉट्सऐप ने एनएसओ ग्रुप के खिलाफ केस दर्ज करा दिया है। दावा किया जा रहा है कि इस अटैक की पीछे एनएसओ का ही हाथ है। इस स्पाइवेयर अटैक में 20 देशों के 1400 डिवाइसेड को हैक किया गया था।