Chandrayaan 2 Launch: चांद के लिए चंद्रयान-2 ने भरी उड़ान, ISRO ने फिर रच दिया इतिहास

ISRO Chandrayaan 2
New Delhi: अंतरिक्ष की दुनिया में भारत ने आज एक बार फिर इतिहास रच दिया है। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने सोमवार दोपहर 2.43 मिनट पर सफलतापूर्वक चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) को लॉन्च किया। चांद पर कदम रखने वाला ये भारत का दूसरा सबसे बड़ा मिशन है।

चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) लॉन्च हो गया है। लेकिन अभी भी अगले कुछ मिनट इस मिशन के लिए काफी जरूरी हैं। अभी यान के दोनों बूस्टर्स अलग हो गए हैं। चंद्रयान-2 अभी शुरुआती दौर में हैं। ISRO की तरफ से कहा गया है कि अभी रॉकेट की गति बिल्कुल सामान्य है। यानी अभी ये यान इसरो की प्लानिंग के हिसाब से ही चल रहा है। दोपहर 2.43 बजे ISRO ने श्रीहरिकोटा से ये मिशन लॉन्च किया। इस मिशन की लागत 978 करोड़ रुपये है।

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चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग सफल हुई है। लॉन्चिंग के बाद वैज्ञानिकों ने तालियां बजाकर मिशन का स्वागत किया। ISRO के चेयरमैन के. सिवन ने स्पेस सेंटर से ही इस बात का ऐलान किया।

एक सप्ताह पहले तकनीकी गड़बड़ी आने के बाद चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) का प्रक्षेपण रोक दिया गया था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिकों ने 15 जुलाई को मिशन के प्रक्षेपण से 56 मिनट 24 सेकंड पहले मिशन नियंत्रण कक्ष से घोषणा के बाद रात 1.55 बजे इसे रोक दिया था। कई दिग्गज वैज्ञानिकों ने इस कदम के लिए इसरो की प्रशंसा भी की थी। उनका कहना था कि जल्दबाजी में कदम उठाने से बड़ा हादसा हो सकता था।

भारत का चंद्रयान -2 प्रक्षेपण होने के बाद चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के करीब लैंडिग करेगा। इस जगह पर इससे पहले किसी भी देश का कोई यान नहीं पहुंचा है।

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विक्रम लैंडर के अलग हो जाने के बाद, यह एक ऐसे क्षेत्र की ओर बढ़ेगा जिसके बारे में अब तक बहुत कम खोजबीन हुई है। ज्यादातर चंद्रयानों की लैंडिंग उत्तरी गोलार्ध में या भूमध्यरेखीय क्षेत्र में हुई हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की ओर से एक अधिकारी ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के करीब स्थान चुनने के बारे में बताया “। इस बार हम एक ऐसे स्थान पर जा रहे हैं जहां पहले कोई नहीं गया है।”

ISRO प्रमुख के. सिवन ने कहा, “विक्रम का 15 मिनट का अंतिम तौर पर उतरना सबसे ज़्यादा डराने वाले पल होंगे, क्योंकि हमने कभी भी इतने जटिल मिशन पर काम नहीं किया है”

लैंडिंग के बाद, रोवर चांद की मिट्टी का रासायनिक विश्लेषण करेगा। वहीं लैंडर चंद्रमा की झीलों को मापेगा और अन्य चीजों के अलावा लूनर क्रस्ट में खुदाई करेगा।

2009 में चंद्रयान -1 के बाद चंद्रमा की सतह पर पानी के अणुओं की मौजूदगी का पता लगाने के बाद से भारत ने भारत ने चंद्रमा की सतह पर पानी की खोज जारी रखी है। चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी से ही भविष्य में यहां मनुष्य के रहने की संभावना बन सकती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2022 तक मानव को अंतरिक्ष में भेजने की बात कही है। अधिकतर विशेषज्ञों का कहना है कि इस मिशन से मिलने वाला जियो-स्ट्रैटेजिक फायदा ज़्यादा नहीं है, लेकिन भारत का कम खर्च वाला यह मॉडल कमर्शियल उपग्रहों और ऑरबिटिंग डील हासिल कर पाएगा।

बता दें ‘चंद्रयान 2’ (Chandrayaan-2) का ऑरबिटर, लैंडर और रोवर लगभग पूरी तरह भारत में ही डिज़ाइन किए गए और बनाए गए हैं, और वह 2.4 टन वज़न वाले ऑरबिटर को ले जाने के लिए अपने सबसे ताकतवर रॉकेट लॉन्चर – GSLV Mk III – का इस्तेमाल करेगा। ऑरबिटर की मिशन लाइफ लगभग एक साल है।

चंद्रयान-2 के 48 दिन की यात्रा के विभिन्न पड़ाव

चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान 22 जुलाई से लेकर 13 अगस्त तक पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाएगा। इसके बाद 13 अगस्त से 19 अगस्त तक चांद की तरफ जाने वाली लंबी कक्षा में यात्रा करेगा। 19 अगस्त को ही यह चांद की कक्षा में पहुंचेगा। इसके बाद 13 दिन यानी 31 अगस्त तक वह चांद के चारों तरफ चक्कर लगाएगा। फिर 1 सितंबर को विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा और चांद के दक्षिणी ध्रुव की तरफ यात्रा शुरू करेगा। 5 दिन की यात्रा के बाद 6 सितंबर को विक्रम लैंडर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा। लैंडिंग के करीब 4 घंटे बाद रोवर प्रज्ञान लैंडर से निकलकर चांद की सतह पर विभिन्न प्रयोग करने के लिए उतरेगा।

भारत चांद की सतह पर लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन जाएगा। इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन अपने यानों को चांद की सतह पर भेज चुके हैं। हालांकि कोई भी देश अब तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास यान नहीं उतार पाया है। ISRO ने 2009 में चंद्रयान-1 को चंद्रमा की परिक्रमा करने के लिए भेजा था लेकिन चांद की सतह पर उतारा नहीं गया था।

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क्या है मकसद, क्या करेगा चंद्रयान
  • चंद्रयान-2 चंद्रमा की सतह पर पानी के प्रसार और मात्रा का अध्ययन करेगा।
  • चंद्रमा के मौसम का अध्ययन करेगा।
  • चंद्रमा की सतह में मौजूद खनिजों और रासायनिक तत्‍वों का अध्‍ययन करेगा।
  • चंद्रमा के बाहरी वातावरण का अध्ययन करेगा।
बाहुबली रॉकेट से भेजा जाएगा चंद्रयान-2
  • ISRO के GSLV Mk III रॉकेट से चंद्रयान-2 को चंद्रमा पर भेजा जाएगा। इस रॉकेट को बाहुबली रॉकेट कहा जाता है।
चंद्रयान-2 की खास बातें
  • वजन – 3800 किलो
  • GSLV Mk III लॉन्चर
  • कुल कितना खर्च: 603 करोड़ रुपये
  • चंद्रमा की सतह से 100Km ऊंचाई वाली कक्षा में चक्कर लगाएगा
  • इस मिशन के साथ 13 पेलोड भेजे जाएंगे। इनमें से 8 पेलोड ऑर्बिटर में, 3 लैंडर में और 2 रोवर में रहेंगे।
चंद्रयान-2 में 3 मॉड्यूल आर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) होंगे। जानें तीनों के क्या काम होंगे-
ऑर्बिटर
  • वजन- 2379 किलो
  • मिशन की अवधि – 1 साल

आर्बिटर चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर की ऊंचाई वाली कक्षा में चक्कर लगाएगा। इसका काम चांद की सतह का निरीक्षण करना और खनिजों का पता लगाना है। इसके साथ 8 पेलोड भेजे जा रहे हैं, जिनके अलग-अलग काम होंगे। इसके जरिए चांद के अस्तित्व और उसके विकास का पता लगाने की कोशिश होगी। बर्फ के रूप में जमा पानी का पता लगाया जाएगा। बाहरी वातावरण को स्कैन किया जाएगा।

लैंडर (विक्रम)
  • वजन- 1471 किलो
  • मिशन की अवधि – 15 दिन

इसरो का यह पहला मिशन है, जिसमें लैंडर जाएगा। लैंडर आर्बिटर (विक्रम) से अलग होकर चंद्रमा की सतह पर उतरेगा। विक्रम लैंडर चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। यह 2 मिनट प्रति सेकेंड की गति से चंद्रमा की सतह पर उतरेगा। विक्रम लैंडर के अलग हो जाने के बाद, यह एक ऐसे क्षेत्र की ओर बढ़ेगा जिसके बारे में अब तक बहुत कम खोजबीन हुई है। लैंडर चंद्रमा की झीलों को मापेगा और अन्य चीजों के अलावा लूनर क्रस्ट में खुदाई करेगा।

रोवर (प्रज्ञान)
  • वजन- 27 किलो
  • मिशन की अवधि – 15 दिन (चंद्रमा का एक दिन)

प्रज्ञान नाम का रोवर लैंडर से अलग होकर 50 मीटर की दूरी तक चंद्रमा की सतह पर घूमकर तस्वीरें लेगा। चांद की मिट्टी का रासायनिक विश्लेषण करेगा। रोवर के लिए पावर की कोई दिक्कत न हो, इसके लिए इसे सोलर पावर उपकरणों से भी लैस किया गया है।