NMC बिल के विरोध में देशभर के डॉक्टर, सरकार से की संशोधन की मांग

NMC Bill
New Delhi: चिकित्सीय क्षेत्र में भ्रष्टाचार खत्म करने और पारदर्शिता बरतने के लिए आ रहे राष्ट्रीय मेडिकल आयोग (National Medical Commission Bill) के विरोध में देशभर के डॉक्टरों ने सरकार को चेतावनी दी है कि विधेयक में संशोधन नहीं हुआ तो राष्ट्रव्यापी हड़ताल भी हो सकती है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), एम्स आरडीए और फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) तक इस विरोध में साथ हैं।

मंगलवार को आईएमए (IMA) की आपातकालीन कार्रवाई समिति की बैठक में एनएमसी विधेयक 2019 (National Medical Commission Bill) के खिलाफ मुहिम छेड़ने का फैसला लिया गया। आईएमए के अनुसार, जनवरी 2017 में भी यह विधेयक सदन में रखा गया था। उस विधेयक से तुलना की जाए तो केवल कॉस्मेटिक बदलाव हुए हैं।

आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर सांतनू सेन ने कहा कि नेक्स्ट और नीट को एक करना उचित नहीं है। लाइसेंस प्राप्त परीक्षा केवल कुछ ही योग्य लोगों को मेडिकल का अभ्यास करने की इजाजत देगी, जबकि नीट मेडिकल में पोस्ट ग्रेजुएशन का सपना देखने वाले सर्वश्रेष्ठ छात्रों का चयन करेगा। इस तरह एमबीबीएस ग्रेजुएशन पूरी कर चुके लगभग 50 प्रतिशत छात्र मॉर्डर्न मेडिसिन का अभ्यास नहीं कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के इस तरह के फैसले से आम जनता की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर चिंताएं ही बढ़ेंगी।

उधर, दिल्ली एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) के अध्यक्ष डॉ. अमरिंदर ने कहा कि विधेयक के जरिए जिस तरह की समिति का गठन सरकार चाहती है, वह एक तानाशाही रवैये जैसा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने कई तरह के संशोधन की मांग की है। इसके अलावा, एम्स के डॉक्टरों ने सदन में मौजूद सभी सांसदों से विधेयक पर चर्चा करने से पहले डॉक्टरों की मांग पर गौर करने की अपील भी की है।

इनके अलावा फोर्डा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुमेध का कहना है कि निजी मेडिकल कॉलेजों में 50 फीसदी सीटों पर फीस नियंत्रण से परेशानी और भी ज्यादा बढ़ेगी। देश में चिकित्सीय शिक्षा पहले से ही काफी महंगी है। हालांकि डॉ. सुमेध का यह भी कहना है कि विधेयक से जुड़े कई बिंदुओं पर सरकार ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। इसलिए विधेयक पर चर्चा से पहले इस मुद्दे पर मंत्रालय को बातचीत करना चाहिए।

गौरतलब है कि 63 साल पुराने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) को हटाकर, उसकी जगह नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) बनाने के लिए सोमवार को लोकसभा में विधेयक 2019 पेश किया गया था। इसमें मेडिकल की शिक्षा, चिकित्सा वृति और मेडिकल संस्थाओं के विकास और नियमन के लिए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग गठित करने का प्रावधान किया गया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन ने यह विधेयक पेश किया।

विधेयक में हैं ये कुछ अहम प्रस्ताव
  • इस विधेयक में देश में मेडिकल की शिक्षा को एक समान बनाने का प्रस्ताव है।
  • मेडिकल के पीजी कोर्सेज में दाखिले के लिए नीट खत्म कर एमबीबीएस के अंतिम वर्ष के परिणाम को आधार बनाने का प्रस्ताव है। साथ ही विदेशों से एमबीबीएस करने वालों को पीजी में दाखिला देने के लिए नेशनल एग्जिट टेस्ट (NEXT) का प्रावधान प्रस्तावित है।
  • एमबीबीएस और पीजी कोर्सेज में 50 फीसदी सीटों के लिए फीस के नियंत्रण का भी प्रावधान किया गया है।
  • विधेयक में आयोग को सलाह देने और सिफारिशें करने के लिए एक आयुर्विज्ञान सलाहकार परिषद के गठन का भी प्रस्ताव है।
  • नेशनल मेडिकल कमीशन में 29 सदस्य होंगे, जिनमें से 20 नॉमिनेशन और 9 चुनाव के जरिए आएंगे।

बता दें कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग से संबंधित संसद की एक स्थायी समिति ने अपनी 92वीं रिपोर्ट में आयुर्विज्ञान शिक्षा और चिकित्सा व्यवसाय की विनियामक पद्धति का पुनर्गठन और सुधार की सिफारिश की है। यह सिफारिश डॉ. रंजीत राय चौधरी की अध्यक्षता वाले विशेष समूह द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने 2009 में मॉडर्न डेंटल कालेज रिसर्च सेंटर व अन्य बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य मामले में 02 मई 2016 को केंद्र सरकार को राय चौधरी समिति की सिफारिशों पर विचार करने और समुचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।

इन सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए लोकसभा में 29 दिसंबर 2017 को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग विधेयक 2017 दोबारा स्थापित किया गया था। इसे बाद में विचार के लिए संसद की स्थायी समिति को भेज दिया गया। स्थायी समिति ने बाद में इस विधेयक पर अपनी रिपोर्ट पेश की। समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने 28 मार्च 2018 को लोकसभा में लंबित विधेयक के संबंध में आवश्यक शासकीय संशोधन प्रस्तुत किया था। लेकिन इसे विचार एवं पारित किए जाने के लिए नहीं लाया जा सका। फिर 16वीं लोकसभा के विघटन के बाद यह समाप्त हो गया।