आज ही के दिन तिरंगा बना था राष्ट्रीय ध्वज, हर भारतीय को जाननी चाहिए ये खास बातें

Indian National Flag Tiranga
New Delhi: भारत को आजादी तो 15 अगस्त 1947 को मिली थी। ये तारीख तो हर भारतीय के जेहन में बसी है। लेकिन आजादी की लड़ाई में कई अहम तारीखों की तरह ही 22 जुलाई भी है, जिसकी अहमियत काफी कम लोगों को पता है। ये वो तारीख है इस आजाद देश की शान हमारे राष्ट्रध्वज (Tricolor) को पहचान मिली थी। 22 जुलाई 1947, ये वो दिन है जब संविधान सभा ने तिरंगे (Tiranga) को देश के राष्ट्रीय ध्वज (National Flag) के तौर पर स्वीकार किया था।

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विशेषज्ञों के अनुसार यह ध्वज (Tricolor) भारत की स्वतंत्रता के संग्राम काल में बनाया गया था। वर्ष 1857 में स्वतंत्रता के पहले संग्राम के समय भारत राष्ट्र का ध्वज (National Flag) बनाने की योजना बनाई गई थी, मगर वह आंदोलन असमय ही समाप्त हो गया था और उसके साथ ही वह योजना भी बीच में ही अटक गई। वर्तमान में पहुंचने से पूर्व भारतीय राष्ट्रीय ध्वज (Tiranga) अनेक पड़ावों से गुजरा है। इस विकास में यह भारत में राजनैतिक विकास का परिचायक भी बन गया।

तिरंगा बनने का यूं चला ऐतिहासिक चक्र

प्रथम ध्‍वज को 1904 में स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता द्वारा बनाया गया । 7 अगस्त, 1906 को पारसी बागान चौक (ग्रीन पार्क) कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) में इसे कांग्रेस के अधिवेशन में फहराया गया था। इस झंडे को लाल, पीले और हरे रंग की क्षैतिज पट्टियों से बनाया गया था। ऊपर की ओर हरी पट्टी में आठ कमल थे और नीचे की लाल पट्टी में सूरज और चांद बनाए गए थे। बीच की पीली पट्टी पर वंदेमातरम लिखा हुआ था।

बताते हैं कि दूसरे ध्‍वज को पेरिस में मैडम कामा और 1907 में उनके साथ निर्वासित किए गए कुछ क्रांतिकारियों द्वारा फहराया गया था। कुछ विशेषज्ञों की मान्यता अनुसार यह 1905 में हुआ था। यह भी पहले ध्वज के समान था। इसके सिवाय कि इसमें सबसे ऊपर की पट्टी पर केवल एक कमल था, किंतु सात तारे सप्तऋषियों को दर्शाते थे। यह ध्वज बर्लिन में हुए समाजवादी सम्मेलन में भी प्रदर्शित भी किया गया था।

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1917 में भारतीय राजनैतिक संघर्ष ने एक निश्चित मोड़ लिया और डॉ. एनी बीसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान तृतीय चित्रित ध्वज को फहराया। इस ध्वज में 5 लाल और 4 हरी क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्तऋषि के वर्णन में इस पर सात सितारे बने थे। ऊपरी किनारे पर बायीं ओर (खंभे की ओर) यूनियन जैक बना था। एक कोने में सफेद अर्धचंद्र और सितारा भी बना हुआ था।

कांग्रेस के सत्र बेजवाड़ा (वर्तमान विजयवाड़ा) में किया गया यहां आंध्र प्रदेश के एक युवक पिंगली वैंकैया ने एक झंडा बनाया (चौथा चित्र) और गांधी जी को दिया। यह दो रंगों का बना था। लाल और हरा रंग जो दो प्रमुख समुदायों अर्थात हिन्दू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्वं करता है। गांधी जी ने सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसमें एक सफेद पट्टी और राष्ट्र की प्रगति का संकेत देने के लिए एक चलता हुआ चरखा होना चाहिए।

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वर्ष 1931 तिरंगे के इतिहास में एक स्मरणीय वर्ष है। तिरंगे ध्वज को भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया गया और इसे राष्ट्र-ध्वज के रूप में मान्यता मिली। यह ध्वज जो वर्तमान स्वरूप का पूर्वज है, केसरिया, सफेद और मध्य में गांधी जी के चलते हुए चरखे के साथ था। यह भी स्पष्ट रूप से बताया गया था कि इसका कोई साम्प्रदायिक महत्त्व नहीं था।

22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने वर्तमान ध्वज को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया। स्वतंत्रता मिलने के बाद इसके रंग और उनका महत्व बना रहा। केवल ध्वज में चलते हुए चरखे के स्थान पर सम्राट अशोक के धर्म चक्र को स्थान दिया गया। इस प्रकार कांग्रेस पार्टी का तिरंगा ध्वज अंतत: स्वतंत्र भारत का तिरंगा ध्वज बना।

हम यहां आपको बता रहे हैं तिरंगे और इसे फहराने के नियमों से जुड़ी वो जरूरी बातें, जो हर भारतीय को जाननी चाहिए..
  • तिरंगे को आंध्रप्रदेश के पिंगली वैंकैया ने बनाया था। वह एक किसान और स्वतंत्रता सेनानी थे।
  • भारत के राष्ट्रीय ध्वज को तैयार करने का कार्य खादी विकास एवं ग्रामोद्योग आयोग को सौंपा गया है।
  • तिरंगे में केसरिया रंग बलिदान, सफेद सच्चाई, शांति व पवित्रता और हरा रंग संपन्नता का प्रतीक है।
  • भारतीय ध्वज को 3:2 के अनुपात में बनाना होता है। इसकी लंबाई चौड़ाई की डेढ़ गुनी होती है।
  • तिरंगे में प्रयोग होने वाला अशोक चक्र सम्राट अशोक से स्तंभ से लिया गया है।
  • झंडे पर कुछ भी बनाना या लिखना गैरकानूनी है।
तिरंगा फहराने के क्या हैं नियम
  • किसी मंच पर तिरंगा फहराते समय जब बोलने वाले का मुंह श्रोताओं की तरफ हो तब तिरंगा हमेशा उसकी दाहिनी तरफ होना चाहिए।
  • ‘फ्लैग कोड ऑफ इंडिया’ (भारतीय ध्वज संहिता) में तिरंगा फहराने के नियम निर्धारित किए गए हैं। इन नियमों का उल्लंघन करने वालों को जेल भी हो सकती है।
  • तिरंगा हमेशा कॉटन, सिल्क या खादी का ही होना चाहिए। प्लास्टिक का झंडा बनाने की मनाही है।
  • किसी भी गाड़ी के पीछे, बोट या प्लेन में तिरंगा नहीं लगाया जा सकता।
  • किसी भी इमारत को ढकने के लिए तिरंगे का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
  • किसी भी स्थिति में तिरंगा जमीन से स्पर्श नहीं होना चाहिए। यह इसका अपमान माना जाता है।
  • किसी भी दूसरे झंडे को राष्ट्रीय झंडे से ऊंचा या ऊपर नहीं लगा सकते। न ही तिरंगे के बराबर रख सकते हैं।
  • आम नागरिकों को अपने घरों या ऑफिस में आम दिनों में भी तिरंगा फहराने की अनुमति 22 दिसंबर 2002 के बाद मिली।
    तिरंगे को रात में फहराने की अनुमति साल 2009 में दी गई।
  • राष्ट्रपति भवन के संग्रहालय में एक ऐसा लघु तिरंगा हैं, जिसे सोने के स्तंभ पर हीरे-जवाहरातों से जड़ कर बनाया गया है।
  • भारतीय संविधान के अनुसार राष्ट्रीय शोक घोषित होने पर कुछ समय के लिए तिरंगे को झुका दिया जाता है। लेकिन सिर्फ उसी भवन का तिरंगा झुकाया जाता है, जहां उस व्यक्ति का पार्थिव शरीर रखा हो जिसके लिए राष्ट्रीय शोक घोषित हुआ है।
  • पार्थिव शरीर के भवन से बाहर निकलते ही ध्वज को फिर से फहरा दिया जाता है।
  • देश के लिए जान देने वाले शहीदों और देश की महान शख्सियतों को निधन के बाद तिरंगे में लपेटा जाता है। इस दौरान
  • केसरिया पट्टी सिर की तरफ और हरी पट्टी पैरों की तरफ होनी चाहिए। शव को जलाने या दफनाने के बाद ध्वज को गोपनीय तरीके से सम्मान के साथ वजन बांधकर पवित्र नदी में जल समाधि दे दी जाती है।